अगस्त में भारत की आर्थिक गतिविधियों में नरमी देखी गई है। 'इको पल्स इंडेक्स' जुलाई के **56** से गिरकर **54.9** पर आ गया है। ऑटोमोबाइल जैसे कंजम्पशन सेक्टर में भारी गिरावट है, हालांकि सर्विसेज और जॉब मार्केट ने अर्थव्यवस्था को संभाले रखा है।
भारत की विकास दर में अगस्त महीने के दौरान सुस्ती के संकेत मिले हैं। इको पल्स इंडेक्स का 54.9 पर आना यह बताता है कि साल की शुरुआत में जो तेज रफ्तार थी, वह अब मॉडरेट हो रही है। हालांकि, यह अभी भी 50 के थ्रेशोल्ड से ऊपर है, जिसका मतलब है कि अर्थव्यवस्था विस्तार (Expansion) मोड में ही है।
कम होती खपत (Cooling Consumption)
कंज्यूमर कॉन्फिडेंस का सीधा असर ऑटो सेल्स पर दिखा है। चार-पहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन की ग्रोथ जुलाई के 27.1% से घटकर 17.7% पर आ गई है। दो-पहिया वाहनों की रफ्तार 34.5% से गिरकर 20.1% रह गई है। सबसे बड़ी गिरावट ट्रैक्टर सेगमेंट में दिखी, जहाँ ग्रोथ 36.9% से लुढ़ककर मात्र 2.1% रह गई। साथ ही, पेट्रोल और डीजल की मांग में भी नरमी देखी गई है।
सर्विसेज और जॉब्स से मिला सहारा
जहां फिजिकल गुड्स की मांग कम हुई है, वहीं सर्विसेज सेक्टर ने मजबूती दिखाई है। सर्विसेज पीएमआई (PMI) जुलाई के 53.3 से बढ़कर 54.1 पर पहुंच गया है। इसका सकारात्मक असर जॉब मार्केट पर भी दिखा है, जहां नौकरी जॉबस्पीक इंडेक्स (Naukri JobSpeak Index) में 13.7% की ग्रोथ दर्ज की गई है।
इंफ्रा और बैंकिंग का दम
आर्थिक नींव अभी भी मजबूत है। बिजली की मांग में 12.8% की बढ़ोतरी दर्ज हुई है। बैंकिंग सेक्टर में नॉन-फूड क्रेडिट ग्रोथ 19.8% और डिपॉजिट ग्रोथ 17.6% रही है। डिजिटल पेमेंट की बात करें तो UPI ट्रांजेक्शन में 22.5% और क्रेडिट कार्ड खर्च में 8.5% की तेजी दिखी है।
अब बाजार की नजर इस बात पर है कि ऑटो सेल्स में आई यह कमी क्या कॉर्पोरेट अर्निंग्स को प्रभावित करेगी, या सर्विस सेक्टर की मजबूती इसे संतुलित कर लेगी।
