भारत के बाहर रहने वाले निवेशक अब केवल पैसा भेजने तक सीमित नहीं हैं। NRI निवेशक अब भारत के शेयर बाजार, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप्स में लॉन्ग-टर्म पैसा लगा रहे हैं, जिससे बाजार की लिक्विडिटी को बड़ा सपोर्ट मिल रहा है।
भारत के 3.5 करोड़ के ग्लोबल डायस्पोरा (Diaspora) का निवेश नजरिया पूरी तरह बदल गया है। दशकों तक, भारत आने वाला पैसा केवल 'रेमिटेंस' यानी परिवार के खर्च के लिए होता था, लेकिन फाइनेंशियल ईयर 2026 के डेटा चौंकाने वाले हैं। रेमिटेंस $143.6 बिलियन के रिकॉर्ड स्तर पर तो पहुंचा, लेकिन इसका एक बड़ा हिस्सा अब इक्विटी मार्केट, इंफ्रास्ट्रक्चर और स्टार्टअप इकोसिस्टम में निवेश किया जा रहा है।
क्यों बदल रहा है निवेश का रुख?
भारतीय फाइनेंशियल मार्केट का तेजी से मैच्योर होना इसकी बड़ी वजह है। जुलाई 2026 तक भारतीय इक्विटीज का कुल मार्केट कैप $5.18 ट्रिलियन के पार निकल गया है। डोमेस्टिक भागीदारी भी रिकॉर्ड हाई पर है, जहां म्यूचुअल फंड्स का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) ₹85.76 लाख करोड़ तक पहुंच चुका है और मंथली SIP कलेक्शन ₹31,961 करोड़ दर्ज किया गया है। एनआरआई (NRI) अब भारत को केवल बचत का जरिया नहीं, बल्कि दुनिया के मुकाबले सबसे बेहतर ग्रोथ वाला निवेश डेस्टिनेशन मान रहे हैं।
डिजिटल क्रांति और GIFT सिटी की भूमिका
निवेश को आसान बनाने में डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर ने अहम भूमिका निभाई है। UPI के जरिए जुलाई 2026 में 23.66 बिलियन ट्रांजेक्शन हुए हैं, जिसने जटिल कागजी कार्रवाई को खत्म कर दिया है। इसके अलावा, GIFT सिटी ने वैश्विक निवेशकों और स्थानीय अवसरों के बीच एक रेगुलेटेड ब्रिज तैयार किया है। अब एनआरआई इंफ्रास्ट्रक्चर इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट्स (InvITs) और अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIF) जैसे विकल्पों तक आसानी से पहुंच पा रहे हैं।
बाजार पर असर और जोखिम
घरेलू निवेशकों के लिए यह एक 'स्टेबलाइजिंग फोर्स' है क्योंकि यह पैसा शॉर्ट-टर्म स्पेक्युलेशन के बजाय लंबे समय के लिए आता है। हालांकि, निवेशकों को कुछ जोखिमों पर नजर रखनी चाहिए:
- वैल्यूएशन का दबाव: स्टार्टअप्स और इंफ्रास्ट्रक्चर में भारी निवेश से कुछ सेक्टर्स में वैल्यूएशन बहुत ज्यादा (Inflated) हो सकती है।
- ग्लोबल अनिश्चितता: जियो-पॉलिटिकल तनाव या वैश्विक मैक्रो-इकोनॉमिक बदलाव इस फ्लो को प्रभावित कर सकते हैं।
- रेगुलेटरी बदलाव: भारत या उन देशों के नियमों में बदलाव जहां ये निवेशक रहते हैं, निवेश के प्रवाह में उतार-चढ़ाव ला सकते हैं।
