बाहरी तरलता (External Liquidity) का गहराता संकट
भारत के बाहरी खाते (External Accounts) एक महत्वपूर्ण बदलाव दिखा रहे हैं। लगातार तीसरे वित्तीय वर्ष में भुगतान संतुलन (Balance of Payments) में घाटा रहने की उम्मीद है। पिछले वर्षों के विपरीत, इस बार मजबूत पूंजी प्रवाह (Capital Inflows) इस घाटे को संतुलित नहीं कर पा रहा है। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, जो $90 से $95 प्रति बैरल के बीच बनी हुई हैं, चालू खाते (Current Account) पर बोझ डाल रही हैं। यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब वैश्विक वित्तीय स्थितियां (Global Financial Conditions) तंग हैं, जिससे देश अस्थिर निवेशों पर निर्भरता के जोखिमों के प्रति अधिक संवेदनशील हो गया है।
