भारत का क्रिएटिव सेक्टर अब **5.7 करोड़** लोगों को रोजगार दे रहा है, जो **2017** के मुकाबले **40%** की भारी बढ़ोतरी है। निवेश के नजरिए से अब NSE का Nifty Waves Index सेक्टर की नई तस्वीर पेश कर रहा है।
ऑरेंज इकोनॉमी का दबदबा
भारत का कल्चरल और क्रिएटिव सेक्टर, जिसे 'ऑरेंज इकोनॉमी' भी कहा जाता है, अब कुल रोजगार का 9% और शहरी नौकरियों का करीब 17% हिस्सा संभाल रहा है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और गुजरात जैसे राज्यों में इस सेक्टर का सबसे ज्यादा प्रभाव है, जहां देश का आधा क्रिएटिव वर्कफोर्स मौजूद है।
NSE का नया कदम
निवेशकों के लिए सबसे बड़ी खबर यह है कि सेक्टर अब असंगठित से संगठित हो रहा है। मई 2025 में लॉन्च हुआ Nifty Waves Index मीडिया, एंटरटेनमेंट और गेमिंग की 43 लिस्टेड कंपनियों के स्वास्थ्य पर नज़र रख रहा है। फिलहाल इस सेक्टर की वैल्यूएशन ₹2.5 लाख करोड़ है, जो 2027 तक ₹3 लाख करोड़ के पार जाने का अनुमान है। इसमें AVGC (एनिमेशन, विजुअल इफेक्ट्स, गेमिंग और कॉमिक्स) की भूमिका सबसे अहम रहने वाली है।
AI का दोहरा प्रभाव
जनरेटिव AI इस सेक्टर के लिए वरदान और चुनौती दोनों बना हुआ है। जहां यह प्रोडक्टिविटी बढ़ा रहा है, वहीं जॉब रिप्लेसमेंट और इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी राइट्स (IPR) जैसे बड़े रिस्क भी पैदा कर रहा है। कंपनियां अब कॉपीराइट प्रोटेक्शन और AI ट्रेनिंग डेटा के लिए नियम बनने का बेसब्री से इंतजार कर रही हैं।
चुनौतियां और सरकारी पहल
सेक्टर की राह में मजदूरी में असमानता (Gender Wage Gap) और असंगठित वर्कफोर्स की चुनौतियां अभी भी कायम हैं। 2026-27 के यूनियन बजट में AVGC Content Creator Labs पर दिया गया जोर इस दिशा में एक बड़ी कोशिश है। आने वाले समय में निवेशकों के लिए यह देखना जरूरी होगा कि कंपनियां AI को अपनाकर अपने मार्जिन को कैसे सुधारती हैं और रेगुलेटरी रिस्क को किस तरह मैनेज करती हैं।
