India's Corporate Gender Gap: क्या POSH नियमों का पालन कर रही हैं कंपनियां? निवेशकों के लिए क्यों है यह बड़ा जोखिम

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
India's Corporate Gender Gap: क्या POSH नियमों का पालन कर रही हैं कंपनियां? निवेशकों के लिए क्यों है यह बड़ा जोखिम

भारत की आर्थिक रफ्तार में महिलाओं की भागीदारी अहम है, लेकिन कार्यस्थल पर सुरक्षा में ढील एक बड़ी चुनौती बन गई है। हालिया आंकड़ों के मुताबिक पेंडिंग POSH शिकायतों में **67%** की भारी बढ़ोतरी हुई है, जो प्रोडक्टिविटी के लिए एक बड़ा खतरा है। निवेशकों के लिए अब ESG डिस्क्लोजर के जरिए कंपनियों की सुरक्षा नीतियों को परखना जरूरी हो गया है।

भारत में महिलाओं की कार्यस्थल पर सुरक्षा सिर्फ एक सामाजिक मुद्दा नहीं, बल्कि सीधे तौर पर कॉर्पोरेट इकोनॉमी से जुड़ा विषय है। जब महिलाएं अपनी करियर चॉइस में सुरक्षा को प्राथमिकता देती हैं, तो सुरक्षित वातावरण न दे पाने वाली कंपनियों के लिए टैलेंट पूल सिकुड़ जाता है, जिससे उनकी कार्यक्षमता पर बुरा असर पड़ता है।

गवर्नेंस पर सवाल

निवेशकों के लिए POSH (Prevention of Sexual Harassment) कानून का पालन सबसे बड़ी चिंता है। फाइनेंशियल ईयर 2022-23 से 2023-24 के बीच शिकायतों में 29% का उछाल आया है, लेकिन उससे भी ज्यादा चिंताजनक बात यह है कि अनसुलझी शिकायतों का बैकलॉग 67% बढ़ गया है। शेयरधारकों के लिए यह एक गवर्नेंस रिस्क है, क्योंकि शिकायतों को सही समय पर न सुलझाना स्टाफ टर्नओवर बढ़ाता है और कंपनी की साख को नुकसान पहुंचाता है।

ESG डिस्क्लोजर और निवेशकों की नजर

भारतीय बाजार में अब BRSR (Business Responsibility and Sustainability Report) के तहत लिस्टेड कंपनियों को जेंडर डायवर्सिटी और सेफ्टी पॉलिसीज का डेटा देना अनिवार्य है। निवेशक अब इस डेटा का उपयोग यह पता लगाने के लिए कर रहे हैं कि कौन सी कंपनियां एक मजबूत वर्क कल्चर बना रही हैं। जिन कंपनियों का रिकॉर्ड खराब है, उन्हें बार-बार नए कर्मचारी रखने और उन्हें ट्रेनिंग देने पर ज्यादा खर्च करना पड़ता है, जिससे उनका ऑपरेटिंग कॉस्ट बढ़ जाता है।

सुरक्षा एक स्ट्रैटेजिक निवेश

अब समय बदल रहा है। अग्रणी कंपनियां सुरक्षा उपायों को केवल एक खर्च नहीं, बल्कि एक रणनीति की तरह देख रही हैं। जानकारों का मानना है कि जेंडर गैप को कम करने से भारत की आर्थिक विकास दर में उल्लेखनीय सुधार हो सकता है। आने वाले समय में, जो कंपनियां महिलाओं को सुरक्षित और समावेशी माहौल देंगी, वे टैलेंट मार्केट में बढ़त हासिल करेंगी। निवेशक अब कंपनियों की एनुअल रिपोर्ट्स में सेफ्टी और जेंडर मेट्रिक्स को बारीकी से ट्रैक कर रहे हैं ताकि जोखिम का सही आकलन किया जा सके।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.