भारत के छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में कंज्यूमर का नजरिया बदल रहा है। अब लोग बजट उत्पादों के बजाय प्रीमियम स्मार्टफोन और घरेलू उपकरणों को तरजीह दे रहे हैं, जिससे कंपनियों को अपनी स्ट्रैटेजी बदलनी पड़ रही है।
भारत का कंज्यूमर मार्केट अब एक बड़े बदलाव के दौर से गुजर रहा है। छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले परिवार अब बेसिक या एंट्री-लेवल प्रोडक्ट्स से ऊपर उठकर प्रीमियम और हाई-कैपेसिटी सामान चुन रहे हैं। इस 'प्रीमियमाइजेशन' (Premiumization) का चलन अब केवल बड़े महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है।
अप्लायंसेज और स्मार्टफोन का ट्रेंड
घरेलू उपकरण (Home Appliances) के सेक्टर में यह बदलाव साफ दिख रहा है। ग्राहक अब छोटी क्षमता के बजाय बड़े मॉडल्स पसंद कर रहे हैं। रेफ्रिजरेटर के बाजार में 180-190 लीटर क्षमता वाले यूनिट्स की मांग बढ़ी है, जबकि 180 लीटर से कम के छोटे फ्रिज की लोकप्रियता कम हुई है। वॉशिंग मशीन सेगमेंट में भी 8-9 किलो वाले मॉडल्स की डिमांड में तेजी आई है।
स्मार्टफोन मार्केट में तो क्रांति जैसी स्थिति है। ₹15,000 से कम कीमत वाले बजट फोंस की मार्केट हिस्सेदारी 2024 के 45% से गिरकर 2026 तक 24% पर सिमट गई है। टॉप-टियर शहरों के बाहर भी प्रीमियम स्मार्टफोन की खरीदारी में 8% की सालाना (Year-on-Year) बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
रियल एस्टेट और कॉर्पोरेट स्ट्रैटेजी
यह ट्रेंड रियल एस्टेट में भी स्पष्ट है। 2026 की पहली छमाही में आठ बड़े शहरों में हुई कुल सेल्स में से 54% घर ₹1 करोड़ से ज्यादा कीमत वाले थे, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 49% था। कंपनियां जैसे Unilever और L'Oreal India अब इस चुनौती से जूझ रही हैं कि कैसे अपने पोर्टफोलियो को प्रीमियम रखें और साथ ही मास-मार्केट के ग्राहकों को भी जोड़े रखें। ई-कॉमर्स का विस्तार और आसान 'EMI' स्कीमों ने टियर-2 और टियर-3 शहरों में इन महंगी चीजों तक पहुंच आसान बना दी है।
आर्थिक जोखिम और स्थिरता
हालांकि यह बढ़ती आकांक्षाओं और आय का संकेत है, लेकिन लंबी अवधि की स्थिरता को लेकर चिंताएं भी हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने साफ किया है कि अगर ग्रोथ सिर्फ अमीरों या शहरी आबादी तक सीमित रही, तो यह टिकाऊ नहीं होगी। भारत की बड़ी आबादी आज भी कृषि और असंगठित क्षेत्र से जुड़ी है, इसलिए विकास का 'इंक्लूसिव' होना बेहद जरूरी है। निवेशकों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां अपनी वॉल्यूम ग्रोथ और मार्जिन के बीच कैसे संतुलन बिठाती हैं।
