India's Capital Account: RBI की सतर्क नीति से सुरक्षित रहेगा बाजार, जानिए क्या है लॉन्ग टर्म विजन

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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India's Capital Account: RBI की सतर्क नीति से सुरक्षित रहेगा बाजार, जानिए क्या है लॉन्ग टर्म विजन

भारत अपने कैपिटल अकाउंट को पूरी तरह खोलने के बजाय बेहद सतर्क और धीमी रफ्तार से आगे बढ़ रहा है। Reserve Bank of India (RBI) की इस नपी-तुली नीति का मकसद ग्लोबल मार्केट के झटकों से भारतीय अर्थव्यवस्था को बचाना और फाइनेंशियल स्टेबिलिटी को बनाए रखना है।

भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती के पीछे एक बड़ी वजह है—पूंजी के प्रवाह (Capital Flow) पर आरबीआई का सख्त और नियंत्रित कंट्रोल। जहां कई एक्सपर्ट्स 'फुल कैपिटल अकाउंट कन्वर्टिबिलिटी' की वकालत करते हैं, वहीं आरबीआई ने हमेशा एक रणनीतिक और क्रमिक रास्ता चुना है। इसका सीधा मकसद भारत को 'हॉट मनी' यानी अटकलबाजी वाली विदेशी पूंजी के उतार-चढ़ाव से दूर रखना है।

क्यों जरूरी है यह नियंत्रण?

जब कोई देश अपना कैपिटल अकाउंट पूरी तरह खोल देता है, तो वह ग्लोबल सेंटिमेंट्स के प्रति बहुत संवेदनशील हो जाता है। उदाहरण के लिए, अमेरिकी फेडरल रिजर्व (U.S. Federal Reserve) के ब्याज दरों में बदलाव का असर तुरंत वहां की करेंसी और बॉन्ड यील्ड पर पड़ता है। 2013 के 'टेपर टैंट्रम' (Taper Tantrum) के दौरान, जब दुनिया भर की इमर्जिंग मार्केट्स में हड़कंप मचा था, तब भी भारत ने अपनी बॉन्ड मार्केट पर कड़े नियंत्रण के चलते खुद को ज्यादा सुरक्षित रखा था।

RBI का स्टेबिलिटी टूलकिट

आरबीआई का नजरिया यह है कि दरवाजा तभी खोला जाए जब वह देश के हित में हो। इसी का नतीजा है 'Fully Accessible Route' (FAR), जिसके जरिए विदेशी निवेशक चुनिंदा सरकारी बॉन्ड्स में बिना किसी लिमिट के पैसा लगा सकते हैं। लेकिन यह सब एक नियंत्रित दायरे में होता है ताकि रुपए (Rupee) की वैल्यू पर दबाव न आए।

निवेशकों के लिए संकेत

निवेशकों के लिए इसका मतलब यह है कि भारतीय बाजार अन्य इमर्जिंग मार्केट्स के मुकाबले कम उतार-चढ़ाव वाले (Less Volatile) हैं। हालांकि, इसका एक छोटा नुकसान यह है कि लिक्विडिटी के मामले में हमें थोड़ा धीमा चलना पड़ता है। भविष्य में ग्लोबल जियो-पॉलिटिकल तनाव और एनर्जी कीमतों की अस्थिरता को देखते हुए आरबीआई अपनी मैक्रो-प्रूडेंशियल नीतियों में बदलाव करता रहेगा। निवेशकों को इन बदलावों पर नजर रखनी चाहिए, क्योंकि इन्हीं से करेंसी और यील्ड की दिशा तय होती है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.