Economic Growth: मुनाफे के साथ बढ़े कर्मचारियों की सैलरी, CEA की कंपनियों को अहम सलाह

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditya Rao|Published at:
Economic Growth: मुनाफे के साथ बढ़े कर्मचारियों की सैलरी, CEA की कंपनियों को अहम सलाह

मुख्य आर्थिक सलाहकार (CEA) V. Anantha Nageswaran ने भारत की इकोनॉमी को लेकर एक बड़ा सुझाव दिया है। उनका कहना है कि लॉन्ग-टर्म ग्रोथ के लिए कंपनियों को अपने प्रॉफिट और कर्मचारियों की सैलरी (wage growth) के बीच संतुलन बनाना होगा, ताकि कंज्यूमर डिमांड बनी रहे।

ग्रोथ की नई रणनीति

ऑल इंडिया मैनेजमेंट एसोसिएशन के एक कार्यक्रम में CEA V. Anantha Nageswaran ने साफ किया कि भारत की विकास दर 6.5 से 7% के बीच स्थिर रह सकती है, लेकिन इसके टिकाऊ होने के लिए लोगों का जीवन स्तर सुधरना जरूरी है। सिर्फ GDP के आंकड़ों से देश की समृद्धि का आकलन नहीं किया जा सकता, समावेशी विकास ही भविष्य है।

कंपनियों के लिए सीख

CEA का मानना है कि कंपनियां और कर्मचारी दुश्मन नहीं, बल्कि एक-दूसरे के पूरक हैं। अक्सर कंपनियां अपने तिमाही मार्जिन को बेहतर दिखाने के लिए सैलरी में कटौती या सप्लायर्स का पेमेंट रोकने का रास्ता चुनती हैं। हालांकि, लॉन्ग-टर्म में यह उन्हीं के लिए नुकसानदेह है। आखिरकार, वही कर्मचारी तो कंपनी के प्रोडक्ट्स के मुख्य कंज्यूमर (ग्राहक) हैं। अगर लोगों की जेब में पैसा नहीं होगा, तो कंपनियों की रेवेन्यू ग्रोथ पर भी लगाम लग जाएगी।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

इन्वेस्टर्स अक्सर ऐसी कंपनियों को पसंद करते हैं जो कॉस्ट कटिंग से प्रॉफिट मार्जिन बढ़ाती हैं। लेकिन अब सरकार का रुख बता रहा है कि केवल कॉस्ट कटिंग पर निर्भर रहना भविष्य में कंजम्पशन के लिए खतरा बन सकता है। रिटेल, ऑटोमोबाइल और कंज्यूमर गुड्स जैसे सेक्टर के निवेशकों को अब यह ट्रैक करना होगा कि कंपनियां प्रॉफिट और वेज बिल के बीच कैसे तालमेल बिठा रही हैं।

सरकार की भूमिका

सरकार ने भी अपनी जिम्मेदारी स्वीकार की है। CEA के मुताबिक, सरकार का मुख्य काम नौकरी देना नहीं, बल्कि बिजनेस करना आसान बनाना है। इसमें सस्ती बिजली, जमीन की उपलब्धता और कम रेगुलेटरी बोझ शामिल हैं ताकि प्राइवेट कंपनियां विस्तार कर सकें और रोजगार के नए अवसर पैदा हों।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.