India's Bond Yield-Growth Gap: क्या ओवरवैल्यूड हो गया है बाजार? समझिए रिस्क

ECONOMY
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AuthorAditi Chauhan|Published at:
India's Bond Yield-Growth Gap: क्या ओवरवैल्यूड हो गया है बाजार? समझिए रिस्क

भारतीय शेयर बाजार में 10-साल के बॉन्ड यील्ड और नॉमिनल GDP ग्रोथ के बीच एक बड़ा गैप दिख रहा है, जो एसेट प्राइस इन्फ्लेशन का खतरा पैदा कर रहा है। सस्ती पूंजी की उपलब्धता ने स्पेक्युलेटिव बेट्स और मार्जिन फंडिंग को बढ़ावा दिया है, जिससे निवेशकों को सतर्क रहने की जरूरत है।

भारतीय फाइनेंशियल मार्केट इस समय इकोनॉमिक ग्रोथ और कैपिटल प्राइजिंग के बीच एक बड़ी खाई से गुजर रहा है। देश का 10-साल का सरकारी बॉन्ड यील्ड अभी 7% के आसपास बना हुआ है, जबकि नॉमिनल GDP ग्रोथ के ऐतिहासिक आंकड़ों के हिसाब से यह 11% के करीब होना चाहिए था। जब उधार लेने की लागत को आर्टिफिशियली कम रखा जाता है, तो यह रिस्क को बढ़ावा देता है और निवेशक उन स्टॉक्स में पैसा लगाने लगते हैं जो शायद लॉन्ग-टर्म अर्निंग पोटेंशियल को सपोर्ट नहीं करते।

स्पेक्युलेटिव निवेश और मार्जिन फंडिंग का जाल

सस्ते कर्ज के इस माहौल ने सट्टेबाजी (Speculation) को हवा दी है। पिछले 3 सालों में मार्जिन फंडिंग में हुई जबरदस्त बढ़ोतरी यह दिखाती है कि रिटेल निवेशक रिकॉर्ड गति से कर्ज लेकर शेयर खरीद रहे हैं। खासकर नॉन-लार्ज कैप शेयरों में वैल्युएशन और बिजनेस परफॉर्मेंस का तालमेल बिगड़ता दिख रहा है। यदि भविष्य में मुद्रास्फीति (Inflation) को नियंत्रित करने के लिए ब्याज दरें बढ़ाई जाती हैं, तो यह 'चीप कैपिटल प्रीमियम' गायब हो सकता है, जिससे मार्केट में गिरावट का रिस्क बना हुआ है।

सरकारी खजाने और ग्लोबल रिस्क

सरकार की राजकोषीय स्थिति भी चिंताजनक है, क्योंकि नए सरकारी कर्ज का लगभग 80% हिस्सा सिर्फ पुराने ब्याज के भुगतान में ही चला जाता है। ऐसे में किसी भी अनचाहे आर्थिक झटके को संभालने के लिए सरकार के पास बहुत कम जगह बचती है। वहीं, ग्लोबल स्तर पर अमेरिकी ट्रेड पॉलिसी और फेडरल रिजर्व की नीतियों के कारण भी कैपिटल फ्लो में अस्थिरता बनी हुई है। इसका सीधा असर भारतीय रुपये और घरेलू लिक्विडिटी पर पड़ सकता है।

निवेशकों के लिए सबसे जरूरी यह है कि वे बॉन्ड यील्ड और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के रुख पर कड़ी नजर रखें। अगर यह गैप कम होता है, तो शेयरों की फिर से प्राइसिंग (Repricing) हो सकती है। उन कंपनियों पर खास ध्यान दें जो ग्रोथ के लिए बहुत ज्यादा कर्ज पर निर्भर हैं, क्योंकि ब्याज दरें बढ़ने पर उनका मार्जिन दबाव में आ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.