भारतीय बासमती चावल के लिए यूरोपीय संघ (EU) से बुरी खबर आ सकती है। खबर है कि EU बासमती को 'Protected Geographical Indication' (PGI) का दर्जा देने के बजाय इसे 'जेनेरिक' प्रोडक्ट के तौर पर वर्गीकृत करने पर विचार कर रहा है, जो भारतीय एक्सपोर्टर्स के लिए बड़ा झटका हो सकता है।
क्या है पूरा मामला?
यूरोपीय संघ (EU) बासमती चावल को एक खास क्षेत्र का उत्पाद मानने के बजाय उसे एक सामान्य 'जेनेरिक' कमोडिटी बनाने की तैयारी में है। भारत ने 2018 में बासमती के लिए PGI दर्जे की मांग की थी, लेकिन सालों की बातचीत के बाद भी यह मामला अभी तक अटका हुआ है। अगर यह फैसला लागू होता है, तो बासमती का वह कानूनी संरक्षण खत्म हो जाएगा जो उसकी शुद्धता और भौगोलिक पहचान को सुरक्षित रखता है।
एक्सपोर्टर्स पर क्या होगा असर?
बासमती एक्सपोर्टर्स, जैसे KRBL और LT Foods, ने दशकों की मेहनत से अंतरराष्ट्रीय बाजार में अपना ब्रांड बनाया है। PGI दर्जा खत्म होने का सीधा मतलब है कि दुनिया में कहीं भी उगाए गए चावल को 'बासमती' के नाम से बेचा जा सकेगा। इससे प्रीमियम प्राइजिंग का वह फायदा खत्म हो जाएगा जो भारतीय कंपनियां फिलहाल उठा रही हैं, जिससे उनके प्रॉफिट मार्जिन पर सीधा असर पड़ सकता है।
भारत-EU व्यापार वार्ता और पेच
यह विवाद भारत और EU के बीच चल रही फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की बातचीत से भी जुड़ा है। यूरोप चाहता है कि भारत अपने बाजार में उनके Cognac और Champagne जैसे उत्पादों को GI संरक्षण दे, जिसकी वैल्यू करीब $6 बिलियन आंकी गई है। भारत इस बदले में बासमती की सुरक्षा की मांग कर रहा है। वहीं, EU बासमती को लेकर भारत और पाकिस्तान की संयुक्त दावेदारी पर जोर दे रहा है, जिसे भारत ने अपनी संप्रभुता का हवाला देते हुए सिरे से खारिज कर दिया है।
अब सबकी नजरें ब्रुसेल्स में होने वाली अगली कूटनीतिक बैठकों पर हैं, क्योंकि यह निर्णय भारतीय चावल उद्योग के भविष्य और मुनाफे की दिशा तय करेगा।
