Insolvency & Bankruptcy Code: रिकवरी रेट में शानदार सुधार, फिर भी 757 दिनों में हो रहा निपटारा

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorNeha Patil|Published at:
Insolvency & Bankruptcy Code: रिकवरी रेट में शानदार सुधार, फिर भी 757 दिनों में हो रहा निपटारा

भारत के इन्सॉल्वेंसी फ्रेमवर्क में Q1 FY27 के दौरान रिकवरी आउटकम्स में सुधार देखा गया है। रेजोल्यूशन-टू-लिक्विडेशन रेश्यो बढ़कर **1.28** पर पहुंच गया है, हालांकि कानूनी देरी के चलते औसत रेजोल्यूशन टाइम **757** दिनों तक खिंच गया है।

रिकवरी की बढ़ती रफ्तार

इन्सॉल्वेंसी फ्रेमवर्क में सुधार के संकेत साफ दिख रहे हैं। FY27 की पहली तिमाही में रेजोल्यूशन-टू-लिक्विडेशन रेश्यो पिछले फाइनेंशियल ईयर के 0.94 से बढ़कर 1.28 हो गया है। यह डेटा बताता है कि अब कंपनियां लिक्विडेशन (बंद होने) की जगह रिस्ट्रक्चरिंग प्लान के जरिए बेहतर तरीके से उभर रही हैं।

क्रेडिटर्स को मिली राहत, फिर भी 'हेयरकट' का दर्द जारी

फाइनेंशियल क्रेडिटर्स के लिए रिकवरी का आंकड़ा 22.8% से बढ़कर 28.6% हो गया है। यह बैंकिंग सेक्टर के लिए एक पॉजिटिव संकेत है, क्योंकि इससे एसेट क्वालिटी में सुधार होता है। हालांकि, कोड के शुरुआत से अब तक क्रेडिटर्स को औसतन 70% का हेयरकट (वैल्यू का नुकसान) झेलना पड़ रहा है, जो अभी भी चिंता का विषय है।

समय की बर्बादी बनी सबसे बड़ी चुनौती

कानूनी तौर पर कॉर्पोरेट इन्सॉल्वेंसी रेजोल्यूशन प्रोसेस (CIRP) को 270 दिनों में पूरा होना चाहिए, लेकिन हकीकत में जून 2026 तक औसत समय 757 दिन दर्ज किया गया है। लगभग 76% मामले 270 दिनों की डेडलाइन पार कर चुके हैं, जिससे National Company Law Tribunal (NCLT) पर भारी दबाव बना हुआ है।

एसेट की गिरती वैल्यू और नया कानून

देरी होने से एसेट की वैल्यू लगातार घटती जा रही है। लगभग आधे मामलों में रिकवरी 20% से भी कम है। इन अड़चनों को दूर करने के लिए 'Insolvency and Bankruptcy Code (Amendment) Act, 2026' लाया गया है, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रोसीजर को तेज करना और पेंडिंग मामलों का बोझ कम करना है। अब निवेशकों की नजर इस बात पर होगी कि क्या ये बदलाव वास्तव में रेजोल्यूशन समय को घटा पाएंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.