भारत में अगस्त के दौरान पिछले तीन सालों में सबसे कम बारिश दर्ज की गई है। El Niño के असर से मानसून में **16%** की गिरावट आई है, जिससे कुल सीजनल डेफिसिट बढ़कर **14%** हो गया है।
भारत मौसम विभाग (IMD) के आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त का महीना खेती-किसानी के लिए काफी चुनौतीपूर्ण रहा है। अगस्त में बारिश लॉन्ग-पीरियड औसत से 16% कम रही है, जो पिछले 3 सालों में सबसे कम है। इसका सीधा असर ओवरऑल मानसून डेफिसिट पर पड़ा है, जो जुलाई के अंत में 13% था, वह अब बढ़कर 14% के स्तर पर पहुंच गया है।
कृषि और फूड इन्फ्लेशन पर मार
इस सूखे का सबसे बड़ा कारण El Niño है। नमी की कमी के कारण खरीफ की फसलों जैसे धान, मक्का और दालों की मैच्योरिटी पर बुरा असर पड़ सकता है। जानकारों का मानना है कि अगर बारिश की कमी से पैदावार प्रभावित होती है, तो खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ सकते हैं। यह स्थिति भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के लिए भी बड़ी चिंता है, क्योंकि महंगाई दर को काबू में रखना उनकी मॉनेटरी पॉलिसी का अहम हिस्सा है।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर असर
निवेशकों की नजर अब ग्रामीण कंजम्पशन पर टिकी है। FMCG, ट्रैक्टर और टू-व्हीलर कंपनियों के लिए ग्रामीण बाजार एक बड़ा वॉल्यूम ड्राइवर होता है। अगर किसानों की आमदनी पर असर पड़ता है, तो आने वाली तिमाहियों में इन सेक्टरों की डिमांड में नरमी आ सकती है। बाजार के एक्सपर्ट्स अब सरकारी आंकड़ों और महंगाई के रुख पर कड़ी नजर बनाए हुए हैं, ताकि रूरल डिमांड की स्थिति को समझा जा सके।
