Indian Agriculture Sector: ₹52 लाख करोड़ का कारोबार, फिर भी शेयर बाजार से दूर क्यों?

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AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Agriculture Sector: ₹52 लाख करोड़ का कारोबार, फिर भी शेयर बाजार से दूर क्यों?

भारत का कृषि क्षेत्र साल 2025-26 तक **₹52.08 लाख करोड़** की ग्रॉस वैल्यू तक पहुंचने के लिए तैयार है, लेकिन इसके बावजूद शेयर बाजार में इस सेक्टर की हिस्सेदारी काफी कम है। खेती से जुड़ी अनिश्चितताएं और बाजार की उम्मीदों के बीच एक बड़ा फासला बना हुआ है।

बाजार से दूरी की असल वजह

भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका बहुत बड़ी है, लेकिन जब बात पब्लिक इक्विटी की आती है, तो लिस्टेड कंपनियां अक्सर सिर्फ बीज, खाद, कीटनाशक या फूड प्रोसेसिंग तक सीमित रहती हैं। सीधे खेती से जुड़ी कंपनियों का बाजार में न होना बड़ी चुनौती है। इसकी मुख्य वजह खेती का 'अनप्रेडिक्टेबल' होना है, जो उन निवेशकों की उम्मीदों के खिलाफ है जो स्टेबल रिटर्न चाहते हैं।

क्यों डरते हैं निवेशक?

खेती का बिजनेस पूरी तरह कॉर्पोरेट कंट्रोल से बाहर की चीजों पर टिका है, जैसे मानसून, ग्लोबल कमोडिटी कीमतों में उतार-चढ़ाव और अचानक बदलती सरकारी एक्सपोर्ट नीतियां। महंगाई को काबू में करने के लिए अचानक एक्सपोर्ट बैन जैसे सरकारी फैसलों से कंपनियों का प्रॉफिट मार्जिन तुरंत प्रभावित हो जाता है। यही कारण है कि IPO लाने वाली कंपनियां भी सतर्क रहती हैं, क्योंकि निवेशकों को ऐसी अनिश्चितता वाले बिजनेस मॉडल में पैसा लगाने से डर लगता है।

रिस्क मैनेजमेंट और SEBI की भूमिका

इस गैप को कम करने के लिए NCDEX जैसे एक्सचेंज काफी अहम हैं, जो प्राइस डिस्कवरी और हेजिंग टूल्स मुहैया कराते हैं। ये टूल कंपनियों को प्राइस रिस्क को मैनेज करने में मदद करते हैं। वहीं, SEBI भी कमोडिटी ट्रेड में पारदर्शिता बढ़ाने के लिए लगातार फ्रेमवर्क को मजबूत कर रही है, ताकि निवेशकों का भरोसा बढ़ सके।

नई उम्मीद: एग्री-टेक और वैल्यू-एडिशन

अब बाजार का ध्यान कच्ची खेती से हटकर एग्री-टेक, प्रिसिजन फार्मिंग और फूड वैल्यू-एडिशन की तरफ बढ़ रहा है। ये सब-सेक्टर्स टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके खेती को मैन्युफैक्चरिंग जैसा व्यवस्थित बिजनेस बना रहे हैं। भविष्य में उन्हीं कंपनियों को फायदा होगा जो रूरल सप्लाई चेन को बेहतर तरीके से संभाल सकेंगी और ट्रेड पॉलिसी की अस्थिरता के बीच अपना प्रॉफिट बरकरार रख पाएंगी।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.