APEDA में बड़े बदलाव की मांग, क्या सुधरेगा भारत का Agri-Export?

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AuthorNeha Patil|Published at:
APEDA में बड़े बदलाव की मांग, क्या सुधरेगा भारत का Agri-Export?

एग्रीकल्चर एंड प्रोसेस्ड फूड प्रोडक्ट्स एक्सपोर्ट डेवलपमेंट अथॉरिटी (APEDA) अब रडार पर है। जानकारों का कहना है कि संस्था को अब रेगुलेटरी भूमिका से हटकर व्यापार को बढ़ावा देने वाली आक्रामक रणनीति अपनानी चाहिए, क्योंकि यह भारत के **$54.73 बिलियन** के कृषि निर्यात सेक्टर की रीढ़ है।

भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के तहत काम करने वाली सरकारी संस्था APEDA को लेकर इन दिनों बड़े बदलावों की चर्चा जोरों पर है। हालांकि यह कोई लिस्टेड कंपनी नहीं है, लेकिन इसकी कार्यक्षमता का सीधा असर भारत की एग्री-एक्सपोर्ट इकोनॉमी पर पड़ता है।

निर्यात में बड़े अवसर

फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में भारत का कृषि और प्रोसेस्ड फूड एक्सपोर्ट $54.73 बिलियन के आंकड़े तक पहुंच गया है। जानकारों का तर्क है कि अगर APEDA एक नियामक संस्था के बजाय एक 'ट्रेड-फोकस्ड थिंक टैंक' की तरह काम करे, तो वैश्विक बाजारों में भारत की हिस्सेदारी और बढ़ सकती है।

प्रमुख चुनौतियां और सुधार

संस्था को कई मोर्चों पर आधुनिकीकरण की जरूरत है:

  • GI टैग: अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रीमियम भारतीय उत्पादों के लिए GI टैग हासिल करने की प्रक्रिया को तेज करना।
  • NPOP सर्टिफिकेशन: ऑर्गेनिक सर्टिफिकेशन के लिए पेंडिंग वेरिफिकेशन को कम करना।
  • क्वालिटी कंट्रोल: वैश्विक आयातकों के कड़े मानकों और सैनिटरी नियमों को पूरा करने के लिए सिस्टम को अपग्रेड करना।

निवेशकों के लिए क्यों है जरूरी?

एग्री-बिजनेस से जुड़ी लिस्टेड कंपनियों, फूड प्रोसेसर्स और लॉजिस्टिक्स प्रोवाइडर्स के लिए APEDA की दक्षता बहुत मायने रखती है। यदि संस्था एक्सपोर्ट प्रोसेस को सरल बनाती है और ट्रेड बैरियर्स को कम करती है, तो इससे पूरी सप्लाई चेन को सीधा फायदा होगा। आने वाले समय में संस्था के स्ट्रक्चर में होने वाले किसी भी बदलाव या नई पॉलिसी का असर निर्यात से जुड़ी कंपनियों के मुनाफे पर पड़ सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.