एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत की **42** कंपनियां AI की नींव मजबूत करने के लिए भारी निवेश करने जा रही हैं। साल **2026** तक इनके कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) में **65%** का उछाल आने का अनुमान है, जो पावर और डेटा सेंटर जैसे सेक्टरों के लिए एक बड़ा गेम चेंजर साबित हो सकता है।
फिजिकल इंफ्रास्ट्रक्चर पर बढ़ा फोकस
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की चर्चा अब केवल सॉफ्टवेयर तक सीमित नहीं है, बल्कि अब जोर हार्डवेयर और इंडस्ट्रियल इंफ्रास्ट्रक्चर पर शिफ्ट हो रहा है। Goldman Sachs की रिपोर्ट के मुताबिक, 2026 में इन 42 प्रमुख कंपनियों की कुल कैपिटल स्पेंडिंग 65% तक बढ़ सकती है, जो 2025 में दर्ज 18% की ग्रोथ के मुकाबले काफी ज्यादा है। यह निवेश मुख्य रूप से पावर जनरेशन, डेटा सेंटर और सेमीकंडक्टर असेंबली सेक्टर में किया जाएगा, जो Nifty 500 इंडेक्स की ग्रोथ में 6% का बड़ा योगदान देने की उम्मीद है।
पावर सेक्टर है सबसे अहम
AI के दौर में बिजली की खपत सबसे बड़ी चुनौती है, इसलिए कुल अतिरिक्त निवेश का लगभग आधा हिस्सा सिर्फ पावर सेक्टर में जा रहा है। डेटा सेंटर्स को चलाने के लिए चौबीसों घंटे बिजली और हाई-टेक इंफ्रास्ट्रक्चर की जरूरत है, जिसे पूरा करने के लिए कंपनियां कमर कस चुकी हैं।
वैल्यूएशन और रिस्क का गणित
निवेशकों के लिए एक चेतावनी यह है कि ये कंपनियां फिलहाल 36 के फॉरवर्ड अर्निंग मल्टीपल पर ट्रेड कर रही हैं, जो MSCI इंडिया इंडेक्स के मुकाबले 85% महंगा है। हालांकि, इनका PEG रेश्यो 1.3 है, जो ब्रॉड मार्केट के 1.4 के मुकाबले बेहतर है, यानी ग्रोथ की संभावना भी अधिक है।
इन्वेस्टर्स को इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि बड़े प्रोजेक्ट्स में एग्जीक्यूशन रिस्क, देरी और कॉस्ट ओवररन जैसी समस्याएं बनी रहती हैं। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ये कंपनियां अपनी बैलेंस शीट को मजबूत रखते हुए इस भारी-भरकम निवेश को कैसे मुनाफे में बदलती हैं।
