अगस्त 2026 में Liberalised Remittance Scheme (LRS) के जरिए भारतीयों ने **$2.74 बिलियन** विदेश भेजे। विदेशी इक्विटी और डेट में निवेश दोगुना होने से साफ है कि भारतीय निवेशक अब अपने पोर्टफोलियो को ग्लोबल स्तर पर डाइवर्सिफाई करने पर जोर दे रहे हैं।
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में भारतीयों ने Liberalised Remittance Scheme (LRS) के तहत $2.74 बिलियन की राशि विदेश भेजी है। यह आंकड़ा पिछले साल की इसी अवधि के मुकाबले 3.6% अधिक है। हालांकि कुल निकासी में मामूली बढ़ोतरी है, लेकिन पैसे भेजने के कारणों में बड़ा बदलाव देखने को मिला है।
विदेशी निवेश में रिकॉर्ड तेजी
आंकड़ों का सबसे अहम हिस्सा निवेश से जुड़ा है। भारतीयों ने अगस्त महीने में विदेशी इक्विटी और डेट इंस्ट्रूमेंट्स में $321.53 मिलियन लगाए। यह पिछले साल के $152.18 मिलियन से 111% ज्यादा है। अब विदेश जाने वाले कुल फंड का 11% हिस्सा निवेश के लिए इस्तेमाल हो रहा है, जो पिछले साल के मुकाबले दोगुना है। निवेशक अब भारतीय बाजार के अलावा डॉलर-डिनॉमिनेटेड एसेट्स में निवेश कर खुद को रुपये की उतार-चढ़ाव से बचाना चाहते हैं।
यात्रा (Travel) अभी भी सबसे आगे
निवेश बढ़ा है, लेकिन विदेश पैसा भेजने की सबसे बड़ी वजह अभी भी 'ट्रेवल' ही है। अगस्त में ट्रेवल से जुड़ी निकासी $1.63 बिलियन रही, जो कुल वॉल्यूम का करीब 60% है। इसमें जुलाई के मुकाबले 11.4% की रिकवरी दिखी है। वहीं, बिजनेस ट्रेवल का आंकड़ा तो 5 गुना बढ़कर $51 मिलियन पर पहुंच गया है।
अन्य कैटेगरी का हाल
- गिफ्ट: इसमें 13.3% की वृद्धि हुई और यह $215.72 मिलियन रहा।
- रिश्तेदारों की मदद: यह $275.43 मिलियन पर स्थिर बना रहा।
- मेडिकल खर्च: इलाज के लिए विदेश भेजे गए फंड में 21.3% का उछाल आया, जो $4.84 मिलियन हो गया।
टैक्स का गणित
LRS के तहत भारतीय प्रति फाइनेंशियल ईयर $250,000 तक विदेश भेज सकते हैं। हालांकि, अधिकांश ट्रांजेक्शन पर Tax Collected at Source (TCS) लगता है। भले ही यह टैक्स इनकम टैक्स रिटर्न में एडजस्ट हो जाता है, लेकिन निवेशकों को शुरुआती कैश-फ्लो के लिहाज से इसे ध्यान में रखना जरूरी है। भविष्य में ग्लोबल मार्केट की स्थिति और रुपये की मजबूती ही यह तय करेगी कि विदेशी निवेश की यह रफ्तार आगे भी कायम रहेगी या नहीं।
