Indian Women Founders: देश की महिला उद्यमियों का दबदबा, कुल शेयर होल्डिंग **₹1 लाख करोड़** के पार

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Women Founders: देश की महिला उद्यमियों का दबदबा, कुल शेयर होल्डिंग **₹1 लाख करोड़** के पार

भारतीय महिला एंटरप्रेन्योर्स अब पब्लिक और प्राइवेट दिग्गज कंपनियों की कमान संभाल रही हैं। इनकी कुल इक्विटी हिस्सेदारी अब लगभग **₹1 लाख करोड़** के स्तर पर पहुंच गई है, जो टेक, कंज्यूमर और फार्मा सेक्टर में उनके बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है।

पब्लिक मार्केट और फाउंडर वेल्थ

इन्वेस्टर्स के लिए किसी कंपनी का लिस्ट होना उसके फाउंडर की वेल्थ को देखने का नजरिया बदल देता है। जहां प्राइवेट कंपनियों में वैल्यूएशन आखिरी फंडिंग राउंड के आधार पर तय होती है, वहीं पब्लिक कंपनियों में फाउंडर की नेट वर्थ रोजाना स्टॉक प्राइस के साथ बदलती है। FSN E-Commerce Ventures (Nykaa) की फाल्गुनी नायर और Biocon की किरण मजूमदार-शॉ जैसे नाम इस बाजार की अस्थिरता (volatility) का सीधा अनुभव कर रही हैं।

आंकड़ों पर गौर करें, तो फाल्गुनी नायर की फैमिली ट्रस्ट के पास Nykaa में 21.03% हिस्सेदारी है, जिसकी वैल्यू सितंबर 2026 तक करीब ₹20,465 करोड़ थी। वहीं, किरण मजूमदार-शॉ की Biocon में 29.73% हिस्सेदारी का मूल्य लगभग ₹19,020 करोड़ है। हालांकि, बड़ी हिस्सेदारी फाउंडर के 'स्किन इन द गेम' यानी कंपनी के प्रति कमिटमेंट को दर्शाती है, लेकिन लिस्टेड कंपनियों में ये फाउंडर्स सेक्टर के रिस्क के प्रति सीधे तौर पर एक्सपोज्ड होते हैं। Honasa Consumer और Nykaa जैसी कंपनियां बेहद कॉम्पिटिटिव पर्सनल केयर मार्केट में काम करती हैं, जहां मार्जिन का दबाव हमेशा बना रहता है।

प्राइवेट दिग्गजों की सफलता

जरूरी नहीं कि बड़ी वेल्थ सिर्फ शेयर बाजार में ही दिखे। सॉफ्टवेयर दिग्गज Zoho इसका बड़ा उदाहरण है। राधा वेम्बू के पास कंपनी की बड़ी हिस्सेदारी है, जिसकी वैल्यू ₹1.03 लाख करोड़ के इंटरनल वैल्यूएशन के आधार पर लगभग ₹49,200 करोड़ आंकी गई है। Zoho का मॉडल इस बात का सबूत है कि कैसे कंपनियां बिना IPO के दबाव के भी बड़े स्केल पर पहुंच सकती हैं। Lenskart और MobiKwik जैसी अन्य प्राइवेट इकाइयां भी इसी तरह के बड़े वैल्यूएशन पर खड़ी हैं।

निवेशकों को किन बातों पर रखना चाहिए ध्यान?

शेयरधारकों के लिए यह देखना जरूरी है कि मैनेजमेंट का लक्ष्य क्या है। हाई प्रमोटर स्टेक अक्सर कंपनी के लॉन्ग-टर्म बिजनेस मॉडल में भरोसे का संकेत देता है। हालांकि, इन्वेस्टर्स को लॉक-इन पीरियड और प्रमोटर द्वारा शेयर बेचने के ट्रेंड पर भी नजर रखनी चाहिए। अंततः, किसी भी कंपनी की सफलता का पैमाना सिर्फ फाउंडर की वेल्थ नहीं, बल्कि बदलती मैक्रो इकोनॉमी के बीच कमाई बढ़ाने की क्षमता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.