भारत के टेक प्रोफेशनल अब पारंपरिक IT सर्विस कंपनियों को छोड़कर ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) को पहली पसंद बना रहे हैं। इसकी मुख्य वजह AI स्किलिंग और करियर ग्रोथ की तलाश है, जिससे डोमेस्टिक IT दिग्गज कंपनियों के लिए खर्च और मार्जिन की चुनौती बढ़ गई है।
भारतीय टेक्नोलॉजी सेक्टर में इस वक्त एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है। Talent500 के हालिया आंकड़ों के अनुसार, जॉब की तलाश कर रहे करीब 69% टेक प्रोफेशनल्स अब ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (GCCs) को पहली प्राथमिकता दे रहे हैं। यह ट्रेंड पुराने और पारंपरिक IT सर्विसेज मॉडल के लिए एक बड़ा झटका है, जो अब तक भारतीय टेक टैलेंट का सबसे बड़ा केंद्र हुआ करता था।
AI ट्रेनिंग की भारी कमी
इस बदलाव के पीछे सबसे बड़ा ट्रिगर 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस' (AI) है। सर्वे में सामने आया है कि करीब 71% टेक प्रोफेशनल्स ऐसी कंपनी ढूंढ रहे हैं जो उन्हें हाथों-हाथ AI ट्रेनिंग दे सके। हैरानी की बात यह है कि केवल 29% कर्मचारी ही वर्तमान में अपनी कंपनियों से इस तरह का सपोर्ट पा रहे हैं। इसी गैप के चलते टैलेंट उन कंपनियों को छोड़कर बाहर जा रहा है जहां मशीन लर्निंग और जनरेटिव AI पर काम करने का मौका नहीं मिल रहा।
IT कंपनियों के लिए बड़ा रिस्क
निवेशकों के लिए यह ट्रेंड खतरे की घंटी हो सकता है। जब MNCs के इंडिया-बेस्ड हब्स यानी GCCs उसी टैलेंट पूल के लिए लड़ते हैं, तो घरेलू IT कंपनियों को उन्हें रोकने के लिए भारी सैलरी देनी पड़ती है। इसका सीधा असर कंपनी के ऑपरेटिंग मार्जिन पर पड़ता है। अब तक भारतीय IT कंपनियां अपनी लागत और स्केल के दम पर टिकी थीं, लेकिन अगर वे हाई-एंड AI प्रोजेक्ट्स नहीं लाती हैं, तो उनके बेस्ट एम्प्लॉईज का टिकना मुश्किल हो जाएगा। निवेशकों को अब तिमाही नतीजों में 'एम्प्लॉई बेनिफिट एक्सपेंस' और 'एट्रिशन रेट' (Attrition Rate) पर बारीकी से नजर रखने की जरूरत है।
विकास की पहेली
हालांकि GCCs में करियर पाथ को लेकर केवल 36% कर्मचारी ही संतुष्ट हैं—जो स्टार्टअप्स के 51% के मुकाबले काफी कम है—फिर भी ग्लोबल ब्रांड का नाम और मोटा पैकेज उन्हें आगे बनाए हुए है। आने वाले समय में वही कंपनियां टैलेंट की लड़ाई जीतेंगी जो इस स्किल गैप को जल्दी भरेंगी।
