नए टैक्स रिजीम के तहत भारतीय करदाताओं को सालाना ₹1 लाख से ज़्यादा की बचत

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Author Aditya Rao | Published :
नए टैक्स रिजीम के तहत भारतीय करदाताओं को सालाना ₹1 लाख से ज़्यादा की बचत
Overview

यूनियन बजट 2025 ने भारत के व्यक्तिगत आयकर (Personal Income Tax) को महत्वपूर्ण रूप से बदला है, जिससे वेतनभोगी व्यक्तियों (salaried individuals) के लिए नई कर व्यवस्था (New Tax Regime) को प्राथमिकता मिली है। ₹20 लाख कमाने वाला व्यक्ति अब ₹1.1 लाख से अधिक की सालाना बचत कर सकता है, वह भी डिडक्शन (deductions) छोड़कर, यह रिवाइज्ड स्लैब दरें (slabs) और बढ़ी हुई स्टैंडर्ड डिडक्शन (standard deduction) की बदौलत संभव हुआ है। करदाता बजट 2026 में और सरलीकरण (Simplification) की उम्मीद कर रहे हैं।

नई कर व्यवस्था से मिल रही है बड़ी बचत

भारत के व्यक्तिगत आयकर ढांचे में यूनियन बजट 2025 के तहत एक निर्णायक बदलाव आया है, जिससे मध्यम वर्ग के करदाताओं की टेक-होम पे (take-home pay) बढ़ी है। सरकार का कटौती-केंद्रित प्रणाली (deduction-heavy system) से एक सरल व्यवस्था की ओर बढ़ना, खासकर नई कर व्यवस्था में, ठोस लाभ दे रहा है, विशेष रूप से वेतनभोगी व्यक्तियों के लिए।

बजट 2025 का टेक-होम पे पर प्रभाव

सबसे बड़ी राहत बजट 2025 में मिली। ₹12 लाख तक की आय अब व्यक्तियों के लिए प्रभावी रूप से कर-मुक्त है, जो स्टैंडर्ड डिडक्शन (standard deduction) को ध्यान में रखने के बाद वेतनभोगी करदाताओं के लिए ₹12.75 लाख तक जाती है। यह, संशोधित कर स्लैब दरों (tax slabs) और बढ़ी हुई स्टैंडर्ड डिडक्शन के साथ मिलकर, विभिन्न आय वर्गों में कमाने वालों के कर बोझ को काफी कम कर दिया है, यहां तक कि ₹20 लाख सालाना कमाने वालों का भी।

पुरानी बनाम नई: एक स्पष्ट अंतर

जबकि पुरानी कर व्यवस्था एचआरए (HRA), एलटीए (LTA), और धारा 80सी (Section 80C) निवेशों जैसे कई छूटों (exemptions) की अनुमति देती थी, ये कटौतियाँ (deductions) नई व्यवस्था में काफी हद तक छोड़ दी जाती हैं। हालांकि, यह समझौता उच्च मूल छूट सीमा (basic exemption limit), कम स्लैब दरों, और ₹75,000 की काफी बढ़ी हुई स्टैंडर्ड डिडक्शन से पूरा हो जाता है। 30% कर दर अब ₹24 लाख से ऊपर लागू होती है, जो पहले के ₹15 लाख के थ्रेशोल्ड (threshold) से काफी अधिक है।

₹20 लाख कमाने वाले का विश्लेषण

वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए एक विस्तृत तुलना से पता चलता है कि ₹20 लाख कमाने वाला एक वेतनभोगी व्यक्ति नई व्यवस्था के तहत ₹1,92,400 का कर भुगतान करता है। यह पुरानी व्यवस्था के ₹3,02,016 के कर दायित्व (tax liability) के बिल्कुल विपरीत है, जिसके परिणामस्वरूप सीधे ₹1,09,616 की कर बचत होती है। यह परिणाम पर्याप्त कटौतियों (substantial deductions) को छोड़ने के बाद भी सही है।

कर व्यवस्था परिवर्तन पर विशेषज्ञ की राय

अमित बैद, हेड ऑफ टैक्स एट बीटीजी अद्वय (BTG Advaya), ने उल्लेख किया कि बजट 2024 और 2025 महत्वपूर्ण मोड़ थे, जिससे मध्यम वर्ग को "महसूस हुआ कि उन्हें देखा जा रहा है"। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि कर बचत अब मासिक रूप से दिखाई दे रही है, जो बढ़ती लागतों के बीच बहुत जरूरी राहत प्रदान कर रही है। अनीता बसरूर, पार्टनर एट सुदित के पारेख एंड कंपनी एलएलपी (Sudit K Parekh & Co LLP), ने संरचनात्मक परिवर्तनों की पुष्टि की, जिसमें बढ़ी हुई कर-मुक्त आय सीमा (tax-free income limit) और नई 30% कर दर थ्रेशोल्ड (tax rate threshold) शामिल है।

बजट 2026 की उम्मीदें

जैसे-जैसे यूनियन बजट 2026 नजदीक आ रहा है, करदाताओं की उम्मीदें सीधे कर दर कटौती (rate cuts) से अधिक सरलीकरण (simplification) और निश्चितता (certainty) पर केंद्रित हैं। आशाओं में स्टैंडर्ड डिडक्शन को ₹1 लाख तक बढ़ाना, 30% कर थ्रेशोल्ड (tax threshold) को ₹35 लाख तक ले जाना, और संभवतः नई व्यवस्था के तहत प्रमुख कटौतियों (key deductions) की अनुमति देना शामिल है। टीडीएस (TDS) अनुपालन (compliance) को सुव्यवस्थित करना और मुकदमेबाजी (litigation) को कम करना भी प्रत्याशा के प्रमुख क्षेत्र हैं।