भारतीय शेयर बाजार फिलहाल एक सीमित दायरे में फंसा हुआ है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) की भारी बिकवाली के चलते बाजार को ऊपर जाने में मुश्किल हो रही है, जबकि Nifty 50 की कंपनियों के मुनाफे में **22%** तक की बढ़त की उम्मीद है।
भारतीय बाजार इस वक्त कंसोलिडेशन (Consolidation) के दौर से गुजर रहा है। हालांकि देश के मैक्रो-इंडिकेटर्स मजबूत हैं, लेकिन विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली बाजार के लिए एक बड़ी दीवार बन गई है। इन निवेशकों के पास अभी भी भारतीय बाजार का करीब 15% हिस्सा है, और इनकी बिकवाली के दबाव ने बाजार की तेजी को थाम रखा है।
अर्निंग्स का हाल और जीडीपी
बाजार की सुस्ती के बावजूद, कंपनियों का परफॉर्मेंस काफी अच्छा दिख रहा है। सितंबर तिमाही के लिए Nifty 50 कंपनियों का नेट प्रॉफिट पिछले साल के मुकाबले 22% तक बढ़ने का अनुमान है। यह ग्रोथ 10% से ऊपर की नॉमिनल जीडीपी रिकवरी के दम पर है। हालांकि, अच्छी कमाई के बावजूद विदेशी फंड्स की निकासी बाजार को बढ़ने नहीं दे रही है।
टेलिकॉम सेक्टर: ग्रोथ का नया केंद्र
जानकारों का मानना है कि टेलिकॉम सेक्टर में अब ग्रोथ की नई कहानी लिखी जा रही है। सेक्टर का भारी खर्च वाला दौर खत्म हो चुका है और अब कंपनियां टैरिफ में 10-15% तक की बढ़ोतरी कर अपना प्रॉफिट बढ़ाने पर फोकस कर रही हैं। 5G सेवाओं और हाई-मार्जिन फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस के चलते कंपनियों का कैश फ्लो आने वाले 3 से 5 सालों में काफी बेहतर होने की उम्मीद है।
कंज्यूमर स्टैपल्स: क्या खरीदारी का सही समय है?
टेलिकॉम के उलट, कंज्यूमर गुड्स (Consumer Staples) को लेकर चिंता बनी हुई है। ये शेयर अपने ऐतिहासिक एवरेज के मुकाबले 25% डिस्काउंट पर मिल रहे हैं, लेकिन फिर भी निवेशक सतर्क हैं। इसकी बड़ी वजह अल नीनो (El Nino) और मानसून की अनिश्चितता है, जिससे ग्रामीण मांग कम हो सकती है और महंगाई बढ़ सकती है।
निवेशकों के लिए आने वाला समय बहुत महत्वपूर्ण है। बाजार की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि विदेशी बिकवाली कब धीमी होती है और कंपनियां उम्मीदों के मुताबिक नतीजे पेश करती हैं या नहीं।
