आज भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत सुस्त हो सकती है। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें **$105** प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं, जिससे निवेशकों की चिंताएं बढ़ गई हैं। इसके अलावा, अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में उछाल और विदेशी निवेशकों (FIIs) की बिकवाली बाजार के सेंटीमेंट पर दबाव बना रही है।
कच्चे तेल का बढ़ता दबाव
मिडिल ईस्ट में तनाव और सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताओं के कारण ब्रेंट क्रूड ऑयल $105 प्रति बैरल के ऊपर निकल गया है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें न केवल करंट अकाउंट डेफिसिट पर असर डालती हैं, बल्कि आयात बिल को भी भारी बना देती हैं।
ऑइल मार्केटिंग कंपनियों पर असर
इस उछाल का सबसे सीधा असर Indian Oil Corporation (IOC), BPCL और HPCL जैसी कंपनियों पर पड़ेगा। जब कच्चे तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची बनी रहती हैं, तो इन कंपनियों के रिफाइनिंग मार्जिन पर दबाव बढ़ जाता है क्योंकि ग्राहकों पर पूरी लागत का बोझ डालना हमेशा आसान नहीं होता।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
बाजार में लिक्विडिटी का संकट बना हुआ है क्योंकि विदेशी निवेशकों (FIIs) ने लगातार दूसरे दिन बिकवाली की है। एक्सचेंज डेटा के अनुसार, 25 सितंबर को विदेशी निवेशकों ने ₹3,696 करोड़ के शेयर बेचे। वहीं, घरेलू संस्थागत निवेशकों (DIIs) ने ₹2,838 करोड़ की खरीदारी करके बाजार को कुछ सहारा दिया, लेकिन बिकवाली और खरीदारी के बीच का अंतर अभी भी अस्थिरता पैदा कर रहा है।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड का गणित
निवेशकों की नजर अमेरिका की 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड पर भी है, जो 5.19% के स्तर पर बनी हुई है। जब अमेरिका में ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो वैश्विक पूंजी सुरक्षित माने जाने वाले अमेरिकी एसेट्स की ओर भागती है, जिससे भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा बाहर निकलता है। इसका सीधा असर भारतीय रुपये की चाल पर भी पड़ रहा है, जिससे भविष्य में रिजर्व बैंक के लिए मॉनेटरी पॉलिसी में ढील देना मुश्किल हो सकता है।
