अक्टूबर महीने में भारतीय शेयर बाजार में शानदार रिकवरी देखने को मिली है। निवेशकों ने AI-बेस्ड शेयरों से पैसा निकालकर IT सर्विसेज में निवेश करना शुरू कर दिया है, जिससे घरेलू बाजार में तेजी आई है।
भारतीय बाजार के लिए अक्टूबर का महीना काफी राहत भरा रहा। तीसरी तिमाही की सुस्ती के बाद, NIFTY ने APAC (जापान को छोड़कर) रीजन के मुकाबले 7% का बेहतर रिटर्न दिया है, जो साल भर पिछड़ने के बाद एक बड़ी वापसी है।
पैसा कहां से कहां जा रहा है?
मार्केट में यह तेजी निवेशकों की रणनीति में बड़े बदलाव के कारण आई है। अब तक जो कैपिटल AI-रिलेटेड स्टॉक्स में फंसी थी, वह अब पारंपरिक IT सर्विसेज कंपनियों की तरफ शिफ्ट हो रही है। अक्टूबर में IT सर्विसेज कंपनियों ने बेंचमार्क इंडेक्स के मुकाबले 14% ज्यादा रिटर्न दिया है, जो इस बात का संकेत है कि निवेशक अब स्टेबल अर्निंग वाले सेक्टर पर भरोसा जता रहे हैं।
विदेशी और घरेलू निवेशकों का दम
बाजार को मजबूती देने में Institutional Investors की बड़ी भूमिका रही है। अक्टूबर के आखिरी हफ्ते में Foreign Institutional Investors ने भारतीय बाजार में USD 1.2 बिलियन का निवेश किया, वहीं Domestic Institutional Investors ने भी USD 400 मिलियन झोंके। इस लिक्विडिटी ने स्मॉल और मिड-कैप शेयरों को संभलने का बड़ा मौका दिया है।
इसके अलावा, MSCI इंडिया इंडेक्स की 89 कंपनियों के नतीजों में 15% का सालाना मुनाफा दर्ज किया गया है। साथ ही रुपये में स्थिरता और गिरते कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों ने भी सेंटिमेंट को सपोर्ट किया है।
वैल्यूएशन का डर
तेजी के बावजूद मार्केट एक्सपर्ट्स अलर्ट पर हैं। NIFTY का फॉरवर्ड P/E रेश्यो 18.4 पर है, जो APAC मार्केट्स के मुकाबले 92% प्रीमियम है। यह वैल्यूएशन अपने ऐतिहासिक उच्चतम स्तर के करीब है, इसलिए अब नवंबर में आने वाले अर्निंग सीजन पर सबकी नजर है। बाजार की आगे की चाल कंपनियों के मुनाफे और ग्लोबल मैक्रो इकोनॉमिक संकेतों पर निर्भर करेगी।
