RBI की ब्याज दरें स्थिर! रेपो रेट **5.25%** पर, शेयर बाजार में दिखी तेजी

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AuthorMehul Desai|Published at:
RBI की ब्याज दरें स्थिर! रेपो रेट **5.25%** पर, शेयर बाजार में दिखी तेजी

भारतीय शेयर बाजार में आज तेजी देखी गई। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा रेपो रेट को **5.25%** पर स्थिर रखने के फैसले के बाद सेंसेक्स **200** अंकों से ज्यादा चढ़ गया। कच्चे तेल की गिरती कीमतों ने जहां बाजार को सहारा दिया, वहीं निवेशक भू-राजनीतिक जोखिमों और विदेशी फंड के बहिर्वाह पर भी नजर रख रहे हैं।

RBI की पॉलिसी का असर और ग्रोथ का अनुमान

भारतीय शेयर बाजारों ने गुरुवार, 6 अगस्त 2026 को बढ़त के साथ शुरुआत की। BSE सेंसेक्स लगभग 201 अंक चढ़कर 78,782 के स्तर पर पहुंच गया। NSE निफ्टी भी 24,641 के करीब कारोबार कर रहा था। यह तेजी इकोनॉमिक पॉलिसी के नतीजों के बाद आई है, जिसमें मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) ने लगातार चौथी बार बेंचमार्क रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखने का फैसला किया है।

RBI के इस फैसले से पता चलता है कि वह भविष्य की पॉलिसी के लिए सतर्क रुख अपना रहा है। निवेशकों के लिए एक अहम बात यह है कि RBI ने चालू वित्तीय वर्ष के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 6.7% कर दिया है, जबकि महंगाई का अनुमान घटाकर 5% कर दिया है। आर्थिक विकास के इस बेहतर अनुमान ने घरेलू निवेशकों को स्थिरता का एहसास कराया, जिससे बाजार की शुरुआती अनिश्चितता कम हुई।

बाजार को चलाने वाले मुख्य कारक

घरेलू पॉलिसी के अलावा, ऊर्जा की गिरती कीमतों ने भी बाजार की भावनाओं को सहारा दिया। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें गिरकर लगभग $79.35 प्रति बैरल पर आ गईं, जिससे भारत के आयात बिल और घरेलू महंगाई को लेकर चिंताएं कम हुईं। शुरुआती सत्र में प्रमुख ऊर्जा और बैंकिंग शेयरों जैसे हैवीवेट स्टॉक्स में हुई खरीदारी ने इंडेक्स को ऊपर उठाने में मदद की।

इसके साथ ही, ट्रेडर्स बाजार में एक तकनीकी बदलाव को भी अपना रहे हैं। एक्सचेंज ने हाल ही में फ्यूचर्स और ऑप्शंस कॉन्ट्रैक्ट्स वाले स्टॉक्स के लिए एक नई क्लोजिंग ऑक्शन सेशन (Closing Auction Session) शुरू की है। इस प्रक्रिया का उद्देश्य प्राइस डिस्कवरी (Price Discovery) में सुधार करना है, लेकिन बाजार सहभागियों के नए सिस्टम के अनुकूल होने के कारण इस हफ्ते इंडेक्स के व्यवहार में कुछ भिन्नता देखी गई है।

जोखिम और निगरानी वाले क्षेत्र

हालांकि दिन की शुरुआत सकारात्मक रही, लेकिन व्यापक बाजार को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) ने हालिया सत्रों में ₹900 करोड़ से अधिक की निकासी के साथ बिकवाली की है। पश्चिम एशिया में लगातार जारी भू-राजनीतिक तनाव एक महत्वपूर्ण कारक बना हुआ है; वैश्विक ऊर्जा कीमतों में कोई भी अचानक वृद्धि घरेलू महंगाई और मार्जिन पर दबाव फिर से बढ़ा सकती है। निवेशक आने वाले ट्रेडिंग सत्रों में विदेशी फंड फ्लो (Fund Flows) और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता की वास्तविकता के साथ इस आशावाद को बाजार कैसे संतुलित करता है, इस पर नजर रख सकते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.