6 अगस्त, 2026 को भारतीय शेयर बाज़ार की शुरुआत सपाट रहने की संभावना है। निवेशक भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नीतिगत फैसलों पर विचार कर रहे हैं, वहीं वैश्विक बाजारों में मुनाफावसूली का दबाव भी है। हालांकि, RBI के स्थिर रेपो रेट और बेहतर आर्थिक अनुमानों ने घरेलू सेंटिमेंट को सहारा दिया है।
RBI के फैसले का बाज़ार पर असर?
आज यानी 6 अगस्त, 2026 को भारतीय शेयर बाज़ार की शुरुआत सपाट या मामूली बढ़त के साथ होने की उम्मीद है। निवेशक 3 से 5 अगस्त, 2026 तक चली भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी की बैठक के नतीजों पर गौर कर रहे हैं। केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट को 5.25% पर स्थिर रखा है और न्यूट्रल पॉलिसी स्टान्स (Neutral Policy Stance) जारी रखा है। RBI के इस फैसले से बाज़ार को स्थिरता मिली है।
RBI ने 2026-27 फाइनेंशियल ईयर के लिए रियल GDP ग्रोथ के अनुमान को बढ़ाकर 6.7% कर दिया है, जो पहले 6.6% था। वहीं, CPI महंगाई दर के अनुमान को 5.1% से घटाकर 5.0% कर दिया गया है। इन बदलावों से घरेलू अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत मिलता है, जो वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू सेंटिमेंट को सहारा दे रहा है।
ग्लोबल संकेतों के मुकाबले घरेलू मजबूती
घरेलू बाज़ार के लिए तस्वीर सकारात्मक बनी हुई है, लेकिन एशियाई बाज़ार में थोड़ी कमजोरी दिख रही है। हालिया तेजी के बाद, खासकर टेक्नोलॉजी और सेमीकंडक्टर सेक्टर में, कई क्षेत्रीय बाज़ार मुनाफावसूली के चलते निचले स्तर पर खुले हैं। मुनाफे की यह वैश्विक प्रवृत्ति अक्सर भारत के अल्पकालिक सेंटिमेंट को प्रभावित करती है, जिससे स्थानीय सूचकांकों में सपाट शुरुआत की उम्मीद है।
बाज़ार की स्थिरता इंडिया VIX (India VIX) के आंकड़ों से भी झलकती है, जो 5 अगस्त को 12.06 पर बंद हुआ। कम VIX बताता है कि बाज़ार में फिलहाल बड़ी उथल-पुथल की उम्मीद कम है। डेरिवेटिव्स सेगमेंट (Derivatives Segment) के आंकड़ों के अनुसार, Nifty 50 इंडेक्स के लिए 24,500 के स्तर पर मजबूत सपोर्ट (Support) दिख रहा है, जबकि 24,600 से 24,700 की रेंज में रेजिस्टेंस (Resistance) बन रहा है। इससे लगता है कि जब तक कोई स्पष्ट दिशात्मक ट्रिगर (Directional Trigger) नहीं मिलता, बाज़ार कंसॉलिडेशन (Consolidation) फेज में रह सकता है।
निवेशकों को क्या देखना चाहिए?
वैश्विक हेडविंड्स (Global Headwinds), जैसे भू-राजनीतिक तनाव (Geopolitical Tensions) और अंतरराष्ट्रीय ब्याज दरों की उम्मीदों में उतार-चढ़ाव के बीच, घरेलू ग्रोथ पर इन कारकों के असर पर नज़र रहेगी। निवेशक विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) के फंड फ्लो (Fund Flow) पर भी ध्यान देंगे, जो अब तक भारतीय बाज़ार में सक्रिय रहे हैं। साथ ही, वैश्विक केंद्रीय बैंकों से कोई नया बयान या कच्चे तेल की कीमतों में कोई अपडेट आने वाले ट्रेडिंग सत्रों के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
