इस हफ्ते भारतीय शेयर बाजार में सिर्फ **4** दिन ही कारोबार होगा, क्योंकि शुक्रवार को महात्मा गांधी जयंती की छुट्टी है। निवेशकों की नजरें बढ़ते क्रूड ऑयल और US ट्रेजरी यील्ड पर टिकी हैं, जिसका असर विदेशी फंड फ्लो पर पड़ सकता है।
बाजार की चाल पर ग्लोबल असर
इस हफ्ते शेयर बाजार में काम-काज कम होगा, लेकिन चुनौतियां ज्यादा हैं। शुक्रवार, 2 अक्टूबर को महात्मा गांधी जयंती के मौके पर मार्केट बंद रहेगा। इस दौरान ट्रेडर्स ग्लोबल इकोनॉमी के दबाव और घरेलू आंकड़ों के बीच तालमेल बिठाने की कोशिश करेंगे।
क्रूड ऑयल का बढ़ता संकट
एनर्जी सेक्टर में अस्थिरता सबसे बड़ी चिंता है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें USD 105 से 106 प्रति बैरल के पास बनी हुई हैं। भारत, जो अपनी जरूरत का अधिकांश तेल आयात करता है, के लिए यह स्थिति मुश्किल पैदा कर रही है। तेल के ऊंचे दाम से आयात बिल बढ़ेगा, रुपये पर दबाव आएगा और ट्रेड डेफिसिट और चौड़ा हो सकता है। इसके अलावा, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव सप्लाई चेन को लेकर अनिश्चितता बढ़ा रहा है, जिससे महंगाई का डर निवेशकों को डरा रहा है।
US बॉन्ड यील्ड और FII का रुख
ग्लोबल स्तर पर फाइनेंशियल स्थितियां सख्त हो रही हैं। US 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड 5.2% के करीब है। जब अमेरिकी बॉन्ड्स में शानदार रिटर्न मिलता है, तो विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) भारत जैसे उभरते बाजारों से पैसा निकालकर सुरक्षित निवेश की ओर भागते हैं। लिक्विडिटी पर इस चोट का सीधा असर इक्विटी वैल्यूएशन पर पड़ता है।
घरेलू आंकड़ों का इंतजार
अब सबकी नजरें घरेलू मोर्चे पर जारी होने वाले डेटा पर हैं। अगस्त का इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन डेटा और HSBC मैन्युफैक्चरिंग PMI रीडिंग यह बताएंगी कि मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर कैसा प्रदर्शन कर रहा है। इसके अलावा, मंथली ऑटो सेल्स के आंकड़े भी बहुत अहम हैं। ऑटो सेक्टर की बिक्री यह दर्शाती है कि शहरी और ग्रामीण इलाकों में कंज्यूमर डिमांड की असल ताकत कितनी है।
फिलहाल मार्केट 'वेट एंड वॉच' की स्थिति में है। इंस्टीट्यूशनल प्लेयर्स सतर्क हैं और RBI की करेंसी मैनेजमेंट पर भी सबकी निगाहें हैं। आने वाले दिनों में बाजार की रिकवरी पूरी तरह से घरेलू ग्रोथ और ग्लोबल दबावों के बीच के अंतर पर टिकी होगी।
