अगस्त 2025 से अगस्त 2026 के बीच भारतीय शेयर बाजार में एक खास ट्रेंड देखने को मिला। जहां सेंसेक्स और निफ्टी जैसे बड़े इंडेक्स में गिरावट आई, वहीं मिडकैप और स्मॉलकैप सेगमेंट ने शानदार वापसी की। इस दौरान डोमेस्टिक निवेशकों का पैसा खूब आया, जिसने फॉरेन निवेशकों की बिकवाली को काफी हद तक संभाला।
बाजार में क्यों दिखी बड़ी कंपनियों और बाकी मार्केट में दूरी?
14 अगस्त 2026 को खत्म हुए 12 महीनों में भारतीय इक्विटी मार्केट ने काफी उतार-चढ़ाव देखे। इस दौरान, सेंसेक्स 3.21% और निफ्टी 50 1.08% तक गिर गए। लेकिन, बाजार का चौड़ा आधार मजबूत रहा।
- Nifty Midcap 100 इंडेक्स में 12.88% का उछाल आया।
- Nifty Smallcap 100 इंडेक्स 12.49% चढ़ा।
इससे पता चलता है कि निवेशक बड़े शेयरों की बजाय मीडियम और छोटी कंपनियों की ओर आकर्षित हुए।
डोमेस्टिक लिक्विडिटी बनाम फॉरेन आउटफ्लो
इस पूरे साल बाजार को सहारा देने में डोमेस्टिक इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (DIIs) का बड़ा हाथ रहा। फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FIIs) लगातार बिकवाली करते रहे और उन्होंने करीब ₹4.84 लाख करोड़ के शेयर बेचे। लेकिन, डोमेस्टिक निवेशकों ने ₹8.92 लाख करोड़ का पैसा बाजार में लगाया, जिससे FIIs की बिकवाली का असर कम हो गया।
सेक्टरों का प्रदर्शन: कौन चमका, कौन पिछड़ा?
अलग-अलग सेक्टरों में प्रदर्शन भी मिला-जुला रहा:
- Nifty Metal इंडेक्स 40.42% के साथ सबसे बेहतर रहा।
- Nifty PSU Bank 24.39% और Nifty Auto 21.10% बढ़ा।
वहीं, वैश्विक मंदी की मार झेल रहे सेक्टर पिछड़ गए:
- Nifty IT इंडेक्स 9.98% गिरा।
- Nifty FMCG सेक्टर 11.05% नीचे आया।
नए निवेशक वर्ग का उदय
बाजार में रिटेल निवेशकों की भागीदारी बढ़ी है, खासकर युवा पीढ़ी (Gen Z) ने डिजिटल प्लेटफॉर्म का खूब इस्तेमाल किया है। सिस्टेमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) के जरिए हर महीने करीब ₹32,000 करोड़ आ रहे हैं, जिसने बाजार को एक मजबूत आधार दिया है।
जोखिम और आगे की राह
बाजार में मजबूती के बावजूद कुछ जोखिम बने हुए हैं। स्मॉलकैप सेगमेंट में वैल्यूएशन (Valuation) काफी ज्यादा है, जिससे करेक्शन का खतरा है। इसके अलावा, वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और ब्याज दरों को लेकर अनिश्चितता भी बाजार पर असर डाल सकती है। निवेशकों को डोमेस्टिक फ्लो की निरंतरता और कंपनियों की कमाई पर नजर रखनी होगी।
