Indian Startups Reverse Flip: अब घर वापसी की तैयारी, स्टार्टअप्स भारत में ला रहे अपना बेस

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorSaanvi Reddy|Published at:
Indian Startups Reverse Flip: अब घर वापसी की तैयारी, स्टार्टअप्स भारत में ला रहे अपना बेस

देश के बड़े स्टार्टअप्स अब अपना लीगल हेडक्वार्टर वापस भारत ला रहे हैं, जिसे 'रिवर्स फ्लिपिंग' कहा जा रहा है। घरेलू बाजारों में IPO लाने और लोकल कैपिटल का फायदा उठाने के लिए कंपनियां यह कदम उठा रही हैं, हालांकि इसमें भारी टैक्स और रीस्ट्रक्चरिंग लागत की चुनौती भी शामिल है।

भारतीय स्टार्टअप इकोसिस्टम में इन दिनों एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है, जिसे 'रिवर्स फ्लिपिंग' कहा जा रहा है। इसका सीधा मतलब है कि वो कंपनियां, जो पहले सिंगापुर या डेलावेयर जैसे देशों में रजिस्टर्ड थीं, अब अपना कानूनी ठिकाना वापस भारत शिफ्ट कर रही हैं। PhonePe, Zepto, Flipkart, Razorpay, Meesho और Pine Labs जैसी दिग्गज कंपनियां या तो यह प्रक्रिया पूरी कर चुकी हैं या इसके अंतिम चरण में हैं, जो भारतीय बाजार के प्रति उनके बदले नजरिए को दर्शाता है।

घरेलू मार्केट में लिस्टिंग की होड़

सालों तक स्टार्टअप्स ग्लोबल वेंचर कैपिटल जुटाने के लिए विदेशों का रुख करते रहे, लेकिन अब हवा बदल गई है। अब इनका मुख्य मकसद NSE और BSE पर IPO लाना है। घरेलू इन्वेस्टर्स और इंस्टीट्यूशंस अब टेक-बेस्ड बिजनेस मॉडल्स को बेहतर समझ रहे हैं, जिससे कंपनियों को स्थानीय बाजार में अच्छी वैल्यूएशन मिलने की उम्मीद है। कुछ टेक स्टार्टअप्स की सफल लिस्टिंग के बाद निवेशकों का भरोसा भी बढ़ा है।

नियमों में मिली राहत

पहले भारत वापस लौटना एक बेहद जटिल कानूनी प्रक्रिया थी, लेकिन सरकार ने सितंबर 2024 में 'Companies Rules' में बदलाव किए हैं। अब 'फास्ट-ट्रैक इनबाउंड मर्जर' की सुविधा मिलने से विदेशी होल्डिंग कंपनियों का भारतीय सब्सिडियरीज में विलय आसान हो गया है। इसके चलते अब कंपनियों को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) के लंबे चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

टैक्स और जोखिम की चुनौती

हालांकि प्रक्रिया आसान हुई है, लेकिन यह सफर सस्ता नहीं है। इस दौरान कंपनियों को भारी कैपिटल गेन्स टैक्स और रीस्ट्रक्चरिंग खर्चों का सामना करना पड़ता है। साथ ही, शेयरहोल्डर एग्रीमेंट्स, ESOPs और FEMA के नियमों का पालन करना एक बड़ी चुनौती है। निवेशकों के लिए देखने वाली बात यह होगी कि ये कंपनियां इस भारी कैश आउटफ्लो को कैसे मैनेज करती हैं और पब्लिक लिस्टिंग के बाद वित्तीय अनुशासन (Financial Discipline) कैसे बरकरार रखती हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.