ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट और विदेशी निवेश की बदौलत इंडियन रुपया आज डॉलर के मुकाबले मजबूत होकर **83.75** के स्तर पर कारोबार कर रहा है।
रुपये में रिकवरी के पीछे का गणित
भारतीय रुपये ने 22 सितंबर को डॉलर के मुकाबले रिकवरी दर्ज की है। पिछले दिन की क्लोजिंग 83.82 के मुकाबले रुपया आज 83.75 पर ट्रेड करता दिखा। इस मजबूती के पीछे सबसे बड़ा कारण ग्लोबल मार्केट में Brent Crude ऑयल की कीमतों में आई कमी है, जो हाल के अपने ऊंचे स्तरों से नीचे फिसले हैं।
क्यों अहम है क्रूड ऑयल?
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात (Import) करता है। जब इंटरनेशनल मार्केट में कच्चा तेल महंगा होता है, तो भारत को अधिक डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे रुपये पर दबाव बढ़ता है। हालांकि, सऊदी अरब की ओर से सप्लाई बढ़ाने और कूटनीतिक चर्चाओं के चलते डॉलर की मांग में कमी आई है, जिससे रुपये को राहत मिली है।
RBI का 'सुरक्षा कवच'
रुपये को संभालने में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) की भूमिका अहम है। अगस्त के अंत तक विदेशी मुद्रा नॉन-रेजिडेंट बैंक डिपॉजिट $133 बिलियन के स्तर पर पहुँच गए थे। वहीं 18 सितंबर तक कुल ओवरसीज इनफ्लो $143.6 बिलियन दर्ज किया गया। RBI स्पॉट मार्केट में लगातार अपनी मौजूदगी बनाए हुए है ताकि रुपये में अचानक आने वाली बड़ी गिरावट को रोका जा सके।
निवेशकों के लिए संकेत
रुपये की चाल का सीधा असर कंपनियों के मुनाफे पर पड़ता है। ऑयल, गैस और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग जैसी इंपोर्ट-आधारित कंपनियों को रुपये की मजबूती से फायदा होता है क्योंकि उनकी लागत कम हो जाती है। इसके उलट, IT और फार्मा जैसी कंपनियां जो डॉलर में कमाई करती हैं, उनके लिए रुपये की मजबूती का मतलब डॉलर से रुपये में कन्वर्जन के दौरान आय में कमी हो सकता है। आने वाले समय में निवेशकों को क्रूड ऑयल की कीमतों और केंद्रीय बैंक के लिक्विडिटी मैनेजमेंट पर नजर रखनी चाहिए।
