आज के कारोबार में भारतीय रुपया **5 पैसे** की मजबूती के साथ **83.57** के स्तर पर बंद हुआ है। इसकी मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में आई गिरावट है।
ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स गिरकर $98.27 प्रति बैरल पर आ गया है, जिससे भारत के लिए इंपोर्ट बिल घटने की उम्मीद जगी है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए तेल की कम कीमतें सीधे तौर पर रुपये पर दबाव कम करती हैं।
बाजार में चुनौतियां अभी बरकरार
हालांकि रुपये में थोड़ी रिकवरी जरूर दिखी है, लेकिन बाजार पर अभी भी कुछ बड़े फैक्टर्स भारी पड़ रहे हैं। डॉलर इंडेक्स 100.70 के स्तर पर मजबूत बना हुआ है। अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों वाली नीतियों के कारण डॉलर में मजबूती बनी हुई है, जो अन्य करेंसीज के लिए मुश्किलें पैदा कर रही है।
FIIs की भारी बिकवाली
रुपये के लिए सबसे बड़ी चुनौती विदेशी निवेशकों (FIIs) का रुख है। मंगलवार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी निवेशकों ने घरेलू बाजार से ₹3,809.99 करोड़ के शेयर बेचे हैं। जब FIIs भारतीय शेयर बेचते हैं, तो वे रुपये को डॉलर में बदलकर पैसा बाहर ले जाते हैं, जिससे करेंसी पर भारी दबाव बनता है।
RBI की भूमिका
मार्केट में किसी भी तरह की बड़ी गिरावट को रोकने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) लगातार नजर बनाए रखता है। अपनी फॉरेक्स रिजर्व का इस्तेमाल कर केंद्रीय बैंक रुपये में आने वाले अचानक उतार-चढ़ाव को मैनेज करता है ताकि अर्थव्यवस्था में स्थिरता बनी रहे। निवेशकों को सलाह है कि वे आगे क्रूड ऑयल की चाल और विदेशी निवेशकों के इन्वेस्टमेंट डेटा पर खास नजर रखें।
