भारतीय रुपया आज **84.39** के स्तर पर खुला, जो पिछले क्लोज से **10 पैसे** की बढ़त है। RBI बैंकिंग सिस्टम में मौजूद **₹10.3 लाख करोड़** के सरप्लस को मैनेज करने के लिए **₹7 लाख करोड़** का बड़ा ऑक्शन कर रहा है।
7 सितंबर, 2026 को भारतीय रुपया 84.39 के स्तर पर कारोबार की शुरुआत करते हुए पिछले क्लोज 84.49 से 10 पैसे की मजबूती के साथ खुला। यह मूवमेंट रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा बैंकिंग सिस्टम में नकदी को संतुलित करने के प्रयासों को दर्शाता है।
RBI का लिक्विडिटी मैनेजमेंट
सेंट्रल बैंक वर्तमान में बैंकिंग सिस्टम में भारी सरप्लस लिक्विडिटी का सामना कर रहा है, जो सितंबर की शुरुआत में 4 साल के उच्चतम स्तर ₹10.3 लाख करोड़ तक पहुंच गया था। यह अतिरिक्त नकदी मुख्य रूप से एक स्पेशल US डॉलर-रुपया फॉरेक्स स्वैप फैसिलिटी से आए $136 बिलियन से अधिक के इनफ्लो का नतीजा है। इस अतिरिक्त नकदी से वित्तीय अस्थिरता न हो, इसके लिए RBI ने ₹7 लाख करोड़ का 30-दिन का वेरिएबल रेट रिवर्स रेपो (VRRR) ऑक्शन आयोजित किया है। यह कदम शॉर्ट-टर्म ब्याज दरों को स्थिर रखने और महंगाई को नियंत्रित करने में मदद करेगा।
ग्लोबल रिस्क और मार्केट आउटलुक
रुपया भले ही शॉर्ट-टर्म में मजबूत दिख रहा हो, लेकिन ग्लोबल फ्रंट पर कुछ चिंताएं बरकरार हैं। निवेशकों की नजर 15-16 सितंबर को होने वाली US फेडरल रिजर्व की बैठक पर टिकी है। हालिया मजबूत US जॉब डेटा के बाद यह उम्मीद बढ़ गई है कि फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में बढ़ोतरी कर सकता है। जब US में दरें बढ़ती हैं, तो अक्सर निवेशक इमर्जिंग मार्केट्स जैसे कि भारत से पैसा निकालकर सुरक्षित US एसेट्स में लगाने लगते हैं, जिसका दबाव रुपये पर पड़ सकता है।
इसके अलावा, मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में उतार-चढ़ाव बना हुआ है। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए तेल की ऊंची कीमतें डॉलर की डिमांड बढ़ाती हैं, जिससे रुपये पर दबाव स्वाभाविक है। मार्केट के जानकार अब RBI के अगले कदमों और ग्लोबल जियोपॉलिटिकल संकेतों पर बारीकी से नजर बनाए हुए हैं।
