भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **19 पैसे** मजबूत खुला, **₹95.57** का स्तर छूआ। ग्लोबल डॉलर इंडेक्स में गिरावट और अमेरिकी ट्रेजरी बॉन्ड बायबैक उपायों से मिली राहत, लेकिन कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें मजबूती को सीमित कर रही हैं।
क्यों मजबूत हुआ रुपया?
20 अगस्त, 2026 को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 19 पैसे की मजबूती के साथ ₹95.57 पर खुला। इसकी मुख्य वजह ग्लोबल डॉलर इंडेक्स में आई गिरावट है, जो तीन महीने के निचले स्तर 98.80 पर पहुँच गया। डॉलर की इस कमजोरी के पीछे अमेरिकी ट्रेजरी का लंबे समय के बॉन्ड को वापस खरीदने (Buyback) का फैसला माना जा रहा है, जिससे अमेरिकी बॉन्ड मार्केट को स्थिरता देने की कोशिश है।
क्या हैं चुनौतियाँ?
हालांकि, रुपये की यह मजबूती अस्थायी साबित हो सकती है। कच्चे तेल की कीमतें $91 प्रति बैरल के ऊपर बनी हुई हैं, जो भारतीय रुपये पर दबाव डाल रही हैं। तेल की बढ़ती कीमतों से भारत का आयात बिल बढ़ जाता है, जिसका सीधा असर रुपये पर पड़ता है। इन ऊंची ऊर्जा कीमतों के पीछे सप्लाई चेन की चिंताएं और अमेरिका-ईरान के बीच जारी भू-राजनीतिक तनाव, खासकर होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर, जिम्मेदार हैं।
RBI की भूमिका और अन्य कारक
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) करेंसी की अस्थिरता को संभालने में अहम भूमिका निभा रहा है। RBI विदेशी मुद्रा भंडार (Forex Market) में लगातार डॉलर बेचकर रुपये को गिरने से रोक रहा है। इसके अलावा, RBI ने अपने कंसेशनल FCNR(B) फॉरेक्स स्वैप सुविधा को 31 अगस्त, 2026 तक आगे बढ़ाने का फैसला किया है, जो लिक्विडिटी को मैनेज करने के लिए है लेकिन फॉरेन करेंसी के फ्लो को भी प्रभावित कर रहा है।
एशियाई मुद्राओं के मिले-जुले प्रदर्शन के बीच भी रुपये का यह मूव देखा जा रहा है। जहाँ मलेशियाई रिंगित में मजबूती दिखी, वहीं दक्षिण कोरियाई वोन और जापानी येन पर दबाव बना रहा।
आगे चलकर, बाज़ार की नज़रें कच्चे तेल की कीमतों, RBI के हस्तक्षेप की फ्रीक्वेंसी और फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) के फ्लो पर टिकी रहेंगी। डॉलर में नरमी और ऊर्जा संकट के बीच का संतुलन ही रुपये की अगली दिशा तय करेगा।
