मंगलवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले **24 पैसे** मजबूत होकर **95.46** पर बंद हुआ। घरेलू शेयर बाजारों में तेजी और वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट ने रुपये को सहारा दिया।
रुपये में आई मजबूती, वजहें क्या रहीं?
मंगलवार, 25 अगस्त, 2026 को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 24 पैसे की मजबूती के साथ 95.46 के स्तर पर बंद हुआ। इस मजबूती की मुख्य वजहें घरेलू शेयर बाजारों की शानदार परफॉर्मेंस और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट रहीं।
शेयर बाजार और कच्चे तेल का असर
शेयर बाजार की बात करें तो BSE सेंसेक्स 286.98 अंक चढ़कर 77,656.09 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 50 115.50 अंक की बढ़त के साथ 24,334.55 पर रहा। बाजार में आई इस तेजी ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया।
इसके साथ ही, कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आई। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर 2.99% गिरकर $89.41 प्रति बैरल पर आ गया। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, ऐसे में तेल की कीमतों में गिरावट से डॉलर की मांग कम होती है, जिसका सीधा फायदा रुपये को मिलता है।
डॉलर इंडेक्स और RBI की भूमिका
वैश्विक स्तर पर, डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की मजबूती को मापता है, 98.96 के स्तर पर थोड़ा कमजोर हुआ। डॉलर में आई इस कमजोरी ने रुपये जैसी उभरती बाजार की मुद्राओं को राहत दी।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी रुपये को स्थिर रखने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। RBI की विशेष USD-INR फॉरेक्स स्वैप सुविधा के तहत 21 अगस्त, 2026 तक $73 बिलियन जमा हो चुके हैं। यह विदेशी मुद्रा का प्रवाह बाजार की अस्थिरता को कम करने में मदद करता है।
इसके अलावा, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने पिछले कारोबारी सत्र में ₹1,181.66 करोड़ के शेयर खरीदे, जिससे बाजार में सकारात्मक सेंटीमेंट बना रहा।
आगे क्या?
हालांकि, रुपये को फिलहाल कुछ राहत मिली है, लेकिन निकट भविष्य में इसकी चाल कच्चे तेल की कीमतों और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों से जुड़े संकेतों पर निर्भर करेगी। बाजार की नजरें कच्चे तेल के दामों और RBI के हस्तक्षेप पर बनी रहेंगी।
