ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल (Crude Oil) की कीमतों में गिरावट और जियो-पॉलिटिकल तनाव कम होने से भारतीय रुपया शुक्रवार को **16 पैसे** उछलकर **96.72** पर बंद हुआ। बाजार में सुधार तो दिखा है, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली अभी भी चिंता का विषय बनी हुई है।
भारतीय रुपया शुक्रवार के सत्र में रिकवरी करते हुए 96.72 के स्तर पर बंद हुआ। इस उछाल ने रुपये की लगातार तीन दिनों से जारी गिरावट पर ब्रेक लगा दिया है। इस रिकवरी के पीछे मुख्य वजह ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude Oil) का $103 प्रति बैरल के नीचे आना है। साथ ही, मिडिल ईस्ट में सैन्य संयम को लेकर अमेरिकी अधिकारियों के बयानों ने वैश्विक स्तर पर जोखिम कम किया है, जिसका फायदा इमर्जिंग मार्केट्स को मिला।
बाजार का मूड और असर
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल के दाम कम होने से करंट अकाउंट पर दबाव घटता है, जो सीधे तौर पर रुपये के लिए मददगार है। घरेलू इक्विटी मार्केट का प्रदर्शन भी शानदार रहा। BSE Sensex 879.09 अंक चढ़कर 72,472.33 पर, जबकि Nifty 50 288.65 अंक की उछाल के साथ 22,520.45 पर बंद हुआ। आईटी सेक्टर में टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) के मजबूत नतीजों—जिसमें कंपनी ने 15% का नेट प्रॉफिट ग्रोथ दिखाया है—ने निवेशकों का भरोसा कायम रखा। रिपोर्ट्स के मुताबिक, मार्केट में उतार-चढ़ाव को थामने के लिए RBI ने भी करेंसी मार्केट में हस्तक्षेप किया होगा।
आगे की चुनौतियां
भले ही शुक्रवार का दिन सकारात्मक रहा, लेकिन चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। सबसे बड़ा रिस्क फॉरेन इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (FII) का फ्लो है। पिछले सत्र में FII ने ₹12,943.58 करोड़ की शुद्ध बिकवाली की है, जो भारतीय शेयरों को लेकर उनकी सतर्कता को दर्शाता है। भविष्य में रुपये की चाल ग्लोबल इंटरेस्ट रेट पॉलिसी और डॉलर की मजबूती पर निर्भर करेगी। निवेशकों के लिए क्रूड ऑयल के ट्रेंड और कंपनियों के अर्निंग्स ग्रोथ पर नजर रखना बहुत जरूरी है ताकि FII की बिकवाली के दबाव को काउंटर किया जा सके।
