मंगलवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले **16 पैसे** की मजबूती के साथ **95.01** के स्तर पर खुला है। इस रिकवरी के पीछे Reserve Bank of India (RBI) की सक्रिय भूमिका है, जिसके पास फिलहाल रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार मौजूद है।
RBI की रणनीति और विदेशी मुद्रा भंडार
भारतीय करेंसी में यह उछाल केंद्रीय बैंक की रणनीति का नतीजा है। साल 2026 में RBI ने करेंसी बाजार में अस्थिरता को रोकने के लिए फॉरवर्ड मार्केट का आक्रामक इस्तेमाल किया है। जुलाई 2026 तक RBI की नेट शॉर्ट फॉरवर्ड पोजीशन रिकॉर्ड $136.7 बिलियन तक पहुंच गई थी। साथ ही, अगस्त के अंत में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार ऐतिहासिक $729.32 बिलियन के शिखर को छू गया, जिसमें $73 बिलियन के स्पेशल स्वैप फैसिलिटी का बड़ा योगदान रहा, जो अब समाप्त हो चुकी है।
चुनौतियां और बाजार का रुख
रुपये में मजबूती के बावजूद बाहरी दबाव बरकरार है। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Brent Crude) की कीमतें $91.36 प्रति बैरल के आसपास बनी हुई हैं। तेल के दाम बढ़ने से भारत का इंपोर्ट बिल बढ़ता है, जिससे रुपये पर दबाव स्वाभाविक है।
इसके अलावा, $73 बिलियन वाली स्वैप फैसिलिटी के खत्म होने के बाद अब बाजार की नजरें विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) और RBI के अगले कदमों पर टिकी हैं। फिलहाल, US Federal Reserve के फैसलों की अटकलों के बीच डॉलर इंडेक्स 99.50 के आसपास मजबूत बना हुआ है, जो भारतीय बाजार के लिए एक बड़ी चुनौती है।
