हफ्ते की शुरुआत में भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले **94.93** के स्तर पर स्थिर खुला है। ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतें **$114.75** प्रति बैरल के पास पहुंच गई हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ रही है और भारतीय मुद्रा पर दबाव बना हुआ है।
भारतीय रुपया सोमवार को मामूली बदलाव के साथ 94.93 पर खुला, जबकि पिछला क्लोजिंग स्तर 94.94 था। बाजार में इस समय ग्लोबल मैक्रो फैक्टर्स का काफी दबाव दिख रहा है, जहां एनर्जी इंपोर्ट कॉस्ट और डॉलर की मजबूती के बीच सीधा टकराव देखने को मिल रहा है।\n\n### कच्चे तेल की कीमतों का असर\n\nग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल $114.75 प्रति बैरल के आसपास बना हुआ है। भारत चूंकि अपनी जरूरत का ज्यादातर तेल आयात करता है, इसलिए तेल की ऊंची कीमतें डॉलर की डिमांड को बढ़ा देती हैं। इसका सीधा असर रुपये की सेहत पर पड़ता है। एविएशन, पेंट और ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के लिए यह स्थिति मार्जिन पर दबाव डालने वाली हो सकती है।\n\n### मार्केट डायनामिक्स और ग्लोबल ट्रेंड्स\n\nडॉलर इंडेक्स अभी 101.62 पर खड़ा है, जो इमर्जिंग मार्केट की करेंसीज के लिए मुश्किलें पैदा कर रहा है। कॉरपोरेट जगत में अब हेजिंग (Hedging) स्ट्रैटेजी को लेकर गहमागहमी है। जहां आईटी और फार्मा जैसे एक्सपोर्टर्स डॉलर की मजबूती का फायदा उठाना चाहते हैं, वहीं इम्पोर्टर्स अपने बिजनेस कॉस्ट को मैनेज करने के लिए गिरावट पर डॉलर की खरीदारी कर रहे हैं। क्षेत्रीय स्तर पर भी मिला-जुला असर है; जहां साउथ कोरियन वोन और जापानी येन में थोड़ी बढ़त दिखी, वहीं फिलिपिनी पेसो पर दबाव बना हुआ है। आने वाले दिनों में क्रूड ऑयल और डॉलर इंडेक्स की चाल ही यह तय करेगी कि भारतीय बाजार का रुख क्या होगा।
