30 सितंबर को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले **95.95** पर खुला है। पिछली क्लोजिंग **95.98** थी। डॉलर इंडेक्स में मजबूती और कच्चे तेल की कीमतों के दबाव के बीच अब सबकी निगाहें RBI के कदमों पर टिकी हैं।
बाजार का हाल और RBI की रणनीति
बुधवार, 30 सितंबर को भारतीय रुपया 95.95 के स्तर पर कारोबार की शुरुआत कर रहा है। निवेशकों की पूरी नजर इस बात पर है कि महीने के अंत में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) करेंसी की वोलेटिलिटी को कैसे संभालता है। ऐतिहासिक रूप से, RBI इस स्तर के आसपास रुपये को सहारा देने के लिए दखल देता रहा है।
क्यों दबाव में है रुपया?
रुपये के सामने कई चुनौतियां हैं। डॉलर इंडेक्स 101.39 के आसपास मजबूती के साथ ट्रेड कर रहा है। इसके अलावा, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $96.56 प्रति बैरल के पास पहुंच गई हैं, जिससे डॉलर की मांग बढ़ रही है और स्थानीय करेंसी पर दबाव बना है। वहीं, US 10-Year Treasury Yield के 5.2340% पर बने रहने से डॉलर को और मजबूती मिल रही है, जो उभरते बाजारों की करेंसी के लिए मुश्किल पैदा कर रहा है।
एशियाई बाजार की चाल
एशियाई करेंसीज का प्रदर्शन मिला-जुला है। जहां जापानी येन में 0.16% की तेजी दिखी, वहीं साउथ कोरियन वोन में 0.43% की गिरावट आई। इसके अलावा, इंडोनेशियाई रुपया और फिलीपीन पेसो में भी कमजोरी देखी गई। वैश्विक स्तर पर डॉलर पिछले एक साल के अपने सबसे बेहतर मंथली प्रदर्शन की ओर बढ़ रहा है।
अब विदेशी व्यापार से जुड़े निवेशकों और कंपनियों के लिए यह देखना दिलचस्प होगा कि RBI महीने के अंत में बाजार को स्थिर रखने के लिए क्या कदम उठाता है।
