Indian Rupee: डॉलर के मुकाबले रुपया स्थिर, RBI के एक्शन से मिली मजबूती

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Rupee: डॉलर के मुकाबले रुपया स्थिर, RBI के एक्शन से मिली मजबूती

भारतीय रुपया (Indian Rupee) आज यानी 25 अगस्त 2026 को अमेरिकी डॉलर (US Dollar) के मुकाबले सपाट खुला है। रुपया 95.72 के स्तर पर बना हुआ है, जो पिछले सत्र के बंद भाव 95.74 से मामूली ही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के दखल और विदेशी निवेश (Foreign Investment) के लगातार प्रवाह से रुपये को सहारा मिल रहा है।

रेंज-बाउंड ट्रेडिंग जारी

25 अगस्त 2026 को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 95.72 के स्तर पर खुला। पिछले सत्र में यह 95.74 पर बंद हुआ था। करेंसी में 95.70 से 95.75 के बीच सीमित दायरे में कारोबार देखने को मिल रहा है, जो वैश्विक आर्थिक उतार-चढ़ावों के बावजूद हफ्ते की एक स्थिर शुरुआत का संकेत देता है।

RBI का मजबूत हाथ

रुपये की स्थिरता में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की सक्रिय भूमिका अहम है। केंद्रीय बैंक विदेशी मुद्रा बाजार (Forex Market) में दखल दे रहा है, और जरूरत पड़ने पर डॉलर बेचकर रुपये को बड़ी गिरावट से बचा रहा है। इस कदम से अचानक आने वाली अस्थिरता कम होती है, जिससे घरेलू कारोबारियों और निवेशकों को राहत मिलती है।

विदेशी निवेश का सहारा

रुपये को मजबूत करने में एक और बड़ा कारण भारतीय शेयरों में विदेशी पैसों का निवेश है। अगस्त 2026 में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPIs) ने भारतीय इक्विटी में $2.5 बिलियन से अधिक का निवेश किया है। यह निवेश घरेलू बाजार में डॉलर की आपूर्ति बढ़ाता है, जिससे रुपये को मजबूती मिलती है।

स्थिरता के सामने चुनौतियां

हालांकि रुपया स्थिर दिख रहा है, लेकिन वैश्विक माहौल से इसे दबाव का सामना करना पड़ रहा है। भारत अपनी तेल की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा आयात करता है, और कच्चे तेल (Crude Oil) की ऊंची कीमतें देश के विदेशी मुद्रा भंडार पर लगातार बोझ डालती हैं। जब तेल की कीमतें बढ़ती हैं, तो भारतीय कंपनियों को आयात के भुगतान के लिए अधिक डॉलर की आवश्यकता होती है, जिससे स्वाभाविक रूप से रुपया कमजोर होता है।

भू-राजनीतिक तनाव का असर

वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव भी आज के बाजार सेंटिमेंट को प्रभावित कर रहा है। अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अपने प्रतिबंधों का विस्तार किया है, जिसने वैश्विक कमोडिटी बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है। निवेशक एशिया भर से इन मिले-जुले संकेतों के बीच नेविगेट कर रहे हैं, जहां की करेंसियां ​​अमेरिकी वित्तीय नीतियों और वैश्विक ब्याज दरों में संभावित बदलावों पर प्रतिक्रिया करते हुए मिश्रित प्रदर्शन दिखा रही हैं।

निवेशकों और व्यवसायों के लिए, वर्तमान माहौल रेंज-बाउंड ट्रेडिंग का है। निर्यातकों द्वारा अपने डॉलर की कमाई को 95.75 से 95.80 के स्तर के करीब कन्वर्ट किए जाने की संभावना है, जबकि आयातक रुपये के मजबूत होने पर डॉलर खरीदते हैं। मुद्रा के लिए अगली महत्वपूर्ण जानकारी तेल की कीमतों के व्यवहार पर निर्भर करेगी और क्या विदेशी निवेश का प्रवाह वर्तमान गति से जारी रहता है, क्योंकि ये कारक सीधे देश के व्यापार संतुलन और समग्र आर्थिक स्वास्थ्य को प्रभावित करते हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.