Indian Rupee: रुपये में आई दो महीने की सबसे बड़ी उछाल, **94.95** के स्तर पर पहुंचा डॉलर के मुकाबले

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorAditi Chauhan|Published at:
Indian Rupee: रुपये में आई दो महीने की सबसे बड़ी उछाल, **94.95** के स्तर पर पहुंचा डॉलर के मुकाबले

मंगलवार को भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले **94.95** के दो महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंच गया। इस मजबूती के पीछे रिकॉर्ड **$729.3 बिलियन** का विदेशी मुद्रा भंडार और RBI की FCNR(B) स्वैप सुविधा की बड़ी भूमिका रही है।

डॉलर की ताकत पर लगा लगाम

भारतीय रुपया मंगलवार को डॉलर के मुकाबले 94.95 के स्तर को छू गया, जो पिछले दो महीनों में इसका सबसे मजबूत प्रदर्शन है। यह उछाल ऐसे समय में आया है जब भारत का फॉरेक्स रिजर्व $729.3 बिलियन के ऑल-टाइम हाई पर पहुंच गया है। इस मजबूती के पीछे रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) द्वारा हाल ही में चलाई गई तीन महीने की विशेष रणनीतिक विंडो का बड़ा हाथ रहा है।

FCNR(B) स्वैप का जादू

इस स्थिरता की मुख्य वजह RBI की 'फॉरेन करेंसी नॉन-रेसिडेंट (बैंक)' यानी FCNR(B) डिपॉजिट स्वैप सुविधा रही है। अगस्त के अंत तक, इस स्कीम के जरिए बैंकिंग सिस्टम में लगभग $65.4 बिलियन का डॉलर फ्लो आया। कुल मिलाकर इस सुविधा से लगभग $72.8 बिलियन का डॉलर इनफ्लो देखा गया, जिसने रुपये को गिरने से बचाने में एक ढाल का काम किया और बाजार में लिक्विडिटी को बैलेंस रखा।

कच्चे तेल और ग्लोबल तनाव से चुनौती

अच्छे रिजर्व डेटा के बावजूद, रुपये पर दबाव अभी खत्म नहीं हुआ है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतें $91 प्रति बैरल के पार बनी हुई हैं। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए भारी आयात करता है, इसलिए तेल की बढ़ती कीमतें डॉलर की मांग को बढ़ाती हैं, जो सीधे रुपये के लिए चुनौती है। इसके अलावा, वेस्ट एशिया में जारी जियोपॉलिटिकल तनाव और अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीतियों को लेकर अनिश्चितता भी ग्लोबल मार्केट के सेंटिमेंट पर असर डाल रही है।

अब आगे क्या होगा?

निवेशकों की नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि RBI की विशेष स्वैप विंडो (जो 8 जून से 31 अगस्त 2026 तक चली) के बंद होने के बाद रुपया कैसा प्रदर्शन करेगा। अब रुपये की स्थिरता पूरी तरह से भारत के ट्रेड बैलेंस, एक्सपोर्ट परफॉरमेंस और विदेशी निवेश (FDI) जैसे बुनियादी आर्थिक कारकों पर निर्भर करेगी। बाजार के जानकारों का मानना है कि यदि भारत की 7.8% की जीडीपी ग्रोथ रफ्तार बरकरार रहती है, तो विदेशी निवेश बना रहेगा, जिससे रुपया आगे भी स्थिर रह सकता है।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.