भारतीय रुपया बुधवार को एक महीने के उच्चतम स्तर पर बंद हुआ, जिसकी मुख्य वजह कच्चे तेल की कीमतों में आई अस्थायी गिरावट रही। हालांकि, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा अपनी प्रमुख रेपो रेट को **5.25%** पर स्थिर रखने के फैसले से इसमें और बढ़ोतरी सीमित रही।
रुपये में आई मजबूती, वजहें क्या हैं?
बुधवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया एक महीने के सबसे मजबूत स्तर पर बंद हुआ, जो 95.1175 पर रहा। इस मजबूती का सबसे बड़ा कारण कच्चे तेल की कीमतों में आई गिरावट थी। आमतौर पर, जब तेल सस्ता होता है तो भारत के लिए इसका सीधा फायदा होता है क्योंकि आयात बिल कम हो जाता है।
RBI के फैसले का असर
दिन की शुरुआत में रुपया 94.92 पर खुला, जो जुलाई की शुरुआत के बाद का सबसे अच्छा स्तर था। लेकिन जैसे-जैसे दिन चढ़ा, यह तेजी धीमी पड़ गई। इसका मुख्य कारण भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का फैसला रहा, जिसने अपनी प्रमुख रेपो रेट को 5.25% पर बरकरार रखा और न्यूट्रल पॉलिसी का रुख बनाए रखा। ब्याज दरों का सीधा असर देश में आने वाले कैपिटल फ्लो पर पड़ता है, और दरों को स्थिर रखने के फैसले से रुपये में बड़ी उछाल नहीं दिखी।
आर्थिक अनुमानों पर RBI का रुख
ब्याज दरों के फैसले के साथ ही RBI ने नए आर्थिक अनुमान भी जारी किए। मौजूदा फाइनेंशियल ईयर के लिए GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% कर दिया गया, जो पहले 6.6% था। वहीं, महंगाई का अनुमान घटाकर 5.0% कर दिया गया। इससे पता चलता है कि RBI ऊर्जा की कीमतों में उतार-चढ़ाव के बावजूद महंगाई को काबू में रखने को लेकर आश्वस्त है। भारत का विदेशी मुद्रा भंडार (Foreign Exchange Reserves) भी $682.4 बिलियन (जुलाई 2026 तक) के मजबूत स्तर पर बना हुआ है, जो करेंसी में किसी भी बड़ी अस्थिरता के खिलाफ एक मजबूत कवच का काम करता है।
आगे क्या?
रुपये के लिए आगे की राह भू-राजनीतिक जोखिमों (geopolitical risks) को देखते हुए अभी भी सतर्क रहने वाली है। हालांकि तेल की कीमतों में शुरुआत में गिरावट आई थी, लेकिन लाल सागर में एक सऊदी तेल टैंकर पर हमले की खबरों के बाद वे फिर से चढ़ गईं। ऐसे घटनाक्रम तेल की कीमतों को अचानक बढ़ा सकते हैं, जो भारत के आयात लागत को बढ़ाकर रुपये के लिए नुकसानदायक साबित हो सकते हैं।
आगे चलकर, रुपये की स्थिरता वैश्विक तेल की कीमतों और ग्लोबल ब्याज दरों के रुख पर निर्भर करेगी। बाजार RBI की ओर से महंगाई पर किसी भी नई टिप्पणी पर नजर रखेगा, साथ ही मध्य पूर्व में तेल आपूर्ति को प्रभावित करने वाली किसी भी घटना पर भी ध्यान देगा। निवेशक टेक्निकल लेवल्स पर भी नजर रखेंगे, जिसमें 94.75 के आसपास सपोर्ट और 95.60 के आसपास रेजिस्टेंस देखा जा रहा है।
