ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और फॉरेन बैंकों द्वारा डॉलर की बिकवाली के कारण Indian Rupee ने एक महीने का उच्चतम स्तर हासिल किया है।
सोमवार को भारतीय रुपये ने मजबूती दिखाते हुए डॉलर के मुकाबले 94.82 का स्तर छू लिया, जो पिछले एक महीने में इसकी सबसे बेहतर स्थिति है। पिछले हफ्ते के मुकाबले करेंसी में करीब 2% का उछाल दर्ज किया गया है। यह रिकवरी तब देखने को मिली है जब कुछ समय पहले रुपया 97 के स्तर के काफी करीब पहुंच गया था, जिसके बाद Reserve Bank of India (RBI) ने इसे सहारा देने के लिए दखल दिया था।
कच्चे तेल की कीमतों में नरमी का असर
रुपये की इस मजबूती के पीछे मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल (Brent crude) की कीमतों में आई गिरावट है। ब्रेंट क्रूड करीब 2% गिरकर $107.7 प्रति बैरल पर आ गया है। इसके पीछे अमेरिकी प्रशासन द्वारा रूसी ऊर्जा निर्यात पर लगे कुछ प्रतिबंधों को कम करने की खबरें हैं, जिससे ग्लोबल सप्लाई बढ़ने की उम्मीद है। चूंकि भारत तेल का बड़ा आयातक (Importer) है, इसलिए तेल सस्ता होने से डॉलर की मांग कम हो गई है, जिससे रुपये पर दबाव घटा है।
बाजार का रुख और RBI की रणनीति
घरेलू बाजार में फॉरेन बैंकों ने डॉलर की अच्छी-खासी बिकवाली की है, जिससे लिक्विडिटी बढ़ी है। हालांकि RBI के इंटरवेंशन ने गिरते रुपये को संभाला है, लेकिन जानकारों का मानना है कि लॉन्ग-टर्म स्थिरता के लिए बेहतर इकोनॉमिक डेटा का आना बेहद जरूरी है।
आगे के लिए क्या है रिस्क?
हालांकि रुपया मजबूत हुआ है, लेकिन ग्लोबल अनिश्चितताएं अभी भी बरकरार हैं। अगर इन्फ्लेशन (Inflation) में तेजी आई या डॉलर इंडेक्स फिर से मजबूत हुआ, तो रुपये पर दबाव बन सकता है। तकनीकी जानकारों की नजर अब 94.80 के अहम सपोर्ट लेवल पर है। अगर यह इसके नीचे सस्टेन करता है, तो रुपया 94.00 के स्तर तक जा सकता है।
