विदेशी निवेश की बदौलत भारतीय रुपया आज 5 पैसे की बढ़त के साथ **94.46** प्रति डॉलर पर पहुंच गया है। यह लगातार पांचवां दिन है जब रुपये में मजबूती दिखी है, हालांकि कच्चे तेल के बढ़ते दाम चिंता का सबब बने हुए हैं।
शुक्रवार, 4 सितंबर 2026 को भारतीय रुपया लगातार पांचवें सत्र में अपनी बढ़त बरकरार रखते हुए 94.46 के स्तर पर कारोबार कर रहा है। इस स्थिरता के पीछे सबसे बड़ा हाथ विदेशी पूंजी का भारी प्रवाह है। रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के विदेशी मुद्रा जमा (foreign-currency deposits) बढ़ाने के प्रयासों का असर दिख रहा है और कुल इनफ्लो $136.377 बिलियन तक पहुंच गया है, जिसने रुपये को बाहरी झटकों से बचाने के लिए एक सुरक्षा कवच प्रदान किया है।
कच्चे तेल की कीमतों का संकट
बाजार में मजबूती के बीच 'मैक्रो रिस्क' अब भी बरकरार है। वैश्विक स्तर पर ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent crude) के दाम $95.90 प्रति बैरल के करीब पहुंच गए हैं। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के चलते होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से आपूर्ति ठप होने का डर सता रहा है। चूंकि भारत अपनी जरूरतों का अधिकांश तेल आयात करता है, इसलिए कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत के लिए एक बड़ी चुनौती हैं। इससे डॉलर की मांग बढ़ेगी और रुपये पर दबाव साफ देखा जा सकता है।
बाजार का सेंटीमेंट
शेयर बाजार में भी निवेशकों का उत्साह बना हुआ है। BSE Sensex में आज सुबह 460 अंक से ज्यादा की तेजी देखी गई। गुरुवार को विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने भारतीय इक्विटी में ₹2,345.87 करोड़ की शुद्ध खरीदारी की है, जो बाजार के प्रति भरोसे को दर्शाता है। विश्लेषकों का मानना है कि USD/INR जोड़ी के लिए 94.00 से 94.20 का स्तर एक मजबूत सपोर्ट जोन बना हुआ है, जबकि कीमतों के और बढ़ने पर यह 95.00 के स्तर पर रेजिस्टेंस का सामना कर सकता है।
