भारतीय रुपया हुआ मजबूत, डॉलर के मुकाबले ₹95.64 पर खुला

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AuthorMehul Desai|Published at:
भारतीय रुपया हुआ मजबूत, डॉलर के मुकाबले ₹95.64 पर खुला

भारतीय रुपया आज, 24 अगस्त को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती के साथ खुला। विदेशी बाजारों से आ रहे भारी निवेश (Capital Inflows) ने रुपये को सहारा दिया है। डॉलर में आई कमजोरी से जहां रुपये को राहत मिली है, वहीं बाज़ार की नज़रें कच्चे तेल की कीमतों और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के संभावित हस्तक्षेप पर भी टिकी हुई हैं। इसके अलावा, भारत और अमेरिका के बीच संभावित व्यापारिक समझौते (Bilateral Trade Deal) को लेकर भी बाज़ार में हलचल है।

रुपये में आई मजबूती का कारण

24 अगस्त को शुरुआती ट्रेडिंग में भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मजबूती दिखाता हुआ खुला। यह पिछले दिन के बंद भाव 95.70 के मुकाबले 6 पैसे ऊपर 95.64 पर खुला। इस तेजी का मुख्य कारण घरेलू बाज़ार में आ रहा मजबूत विदेशी निवेश (Capital Inflows) है, जिसने स्थानीय मुद्रा को सहारा दिया है।

वैश्विक बाज़ार का असर

वैश्विक बाज़ार के रुझानों ने भी रुपये की चाल पर असर डाला है। अमेरिकी डॉलर अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में कमजोरी दिखा रहा है और कई महीनों के निचले स्तर के करीब कारोबार कर रहा है। इसका फायदा एशियाई मुद्राओं को भी मिला है, जिनमें इंडोनेशियाई रुपिया, दक्षिण कोरियाई वॉन और ताइवान डॉलर जैसी मुद्राएं भी डॉलर के मुकाबले मजबूत हुई हैं।

बाज़ार की चिंताएं और RBI की भूमिका

रुपये की इस सकारात्मक शुरुआत के बावजूद, ट्रेडर और विश्लेषक कुछ प्रमुख कारकों पर पैनी नज़र रखे हुए हैं। सबसे बड़ा दबाव कच्चे तेल की कीमतों से आ रहा है, जो $94 प्रति बैरल के करीब बनी हुई हैं। कच्चे तेल के ऊंचे दाम अक्सर तेल कंपनियों को आयात बिलों के भुगतान के लिए ज़्यादा डॉलर खरीदने पर मजबूर करते हैं, जिससे डॉलर की मांग बनी रहती है। ऐसे में, आयातकों को सतर्क रहने की सलाह दी जा रही है, जबकि निर्यातकों के लिए 95.75 के स्तर के करीब डॉलर बेचने के अवसर बन सकते हैं।

बाजार विश्लेषकों का मानना है कि भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) भी इस पर कड़ी नज़र रखे हुए है और यदि रुपये में अत्यधिक अस्थिरता देखी जाती है, खासकर 95.75 के स्तर के आसपास, तो वह हस्तक्षेप कर सकता है। यह मौजूदा सप्ताह महत्वपूर्ण है क्योंकि यह फॉरेन करेंसी नॉन-रेजिडेंट (FCNR) जमाओं की अंतिम अवधि है, और इसमें कोई भी हलचल मुद्रा की तरलता और स्थिरता को प्रभावित कर सकती है।

भू-राजनीतिक और व्यापारिक संकेत

बाज़ार की भावना पर भू-राजनीतिक घटनाओं और राजनयिक चर्चाओं का भी असर पड़ रहा है। ईरान पर संभावित अमेरिकी प्रतिबंधों को लेकर जारी तनाव वैश्विक बाज़ारों के लिए एक जोखिम बना हुआ है। दूसरी ओर, भारत में अमेरिकी राजदूत की ओर से दोनों देशों के बीच व्यापार समझौते के करीब होने की ख़बरों ने निवेशकों का ध्यान भविष्य की द्विपक्षीय व्यापार संभावनाओं की ओर खींचा है।

आने वाले दिनों में, यह देखना अहम होगा कि रुपया किस तरह मजबूत विदेशी निवेश और तेल आयातकों की निरंतर मांग के बीच संतुलन बनाता है। निवेशक RBI की हस्तक्षेप नीति और संभावित अमेरिका-भारत व्यापार समझौते पर किसी भी आधिकारिक बयान पर बारीकी से नज़र रखेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.