Indian Rupee: रुपया लुढ़कने के कगार पर! जनवरी तक 96 के स्तर को छूने का अनुमान

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian Rupee: रुपया लुढ़कने के कगार पर! जनवरी तक 96 के स्तर को छूने का अनुमान

Indian Rupee में लगातार गिरावट देखी जा रही है और यह **94.80** के करीब ट्रेड कर रहा है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि विदेशी निवेशकों की रिकॉर्ड बिकवाली और कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के चलते यह जनवरी **2027** तक **96** के स्तर तक फिसल सकता है।

रुपये पर चौतरफा दबाव\n\nभारतीय रुपया इन दिनों काफी उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है और डॉलर के मुकाबले 94.70–94.85 के दायरे में अटका हुआ है। फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स का मानना है कि दबाव इतना अधिक है कि जनवरी 2027 तक यह 96 के अहम लेवल को टेस्ट कर सकता है।\n\n### बिकवाली की मार\n\nइस गिरावट के पीछे सबसे बड़ी वजह विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) की जबरदस्त बिकवाली है। साल 2026 में अब तक FIIs ने भारतीय बाजार से रिकॉर्ड पैसा निकाला है, अक्टूबर तक कुल बिकवाली का आंकड़ा ₹2.95 लाख करोड़ के पार निकल चुका है। जब विदेशी निवेशक पैसा बाहर निकालते हैं, तो वे भारतीय रुपये को बेचकर डॉलर खरीदते हैं, जिससे रुपये की कीमत कम हो जाती है।\n\n### कच्चे तेल की चुनौती\n\nऊपर से क्रूड ऑयल (Crude Oil) की बढ़ती कीमतें आग में घी का काम कर रही हैं। भारत एक बड़ा एनर्जी आयातक है, ऐसे में तेल महंगा होने से डॉलर की मांग बढ़ जाती है, जो रुपये को और कमजोर करती है। हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि रुपया फिलहाल 100 के स्तर तक तो नहीं जाएगा।\n\n### RBI की भूमिका और चुनौतियां\n\nरिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) बाजार में रुपये को गिरने से बचाने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। अक्टूबर के अंत तक विदेशी मुद्रा भंडार $719.75 अरब था, जिसका इस्तेमाल RBI ने भारी अस्थिरता को रोकने के लिए किया है। हालांकि, केंद्रीय बैंक की मुसीबत यह है कि उस पर $239.2 अरब की फॉरवर्ड डॉलर लायबिलिटीज का रिकॉर्ड बोझ है, जो लंबी अवधि में हस्तक्षेप करने की क्षमता को सीमित कर सकता है।\n\n### निवेशकों के लिए सबक\n\nरुपया कमजोर होने से इंपोर्ट-डिपेंडेंट सेक्टर जैसे इलेक्ट्रॉनिक्स, गोल्ड और एनर्जी कंपनियों के मुनाफे (Profit Margins) पर असर पड़ सकता है। वहीं, आईटी और फार्मा जैसे एक्सपोर्टर्स को हल्का फायदा हो सकता है। अक्टूबर में कंपनियों द्वारा डॉलर हेजिंग (Hedging) में 35% की गिरावट आई है, जो संकेत देता है कि कंपनियां अब इस नए माहौल के हिसाब से खुद को ढालने की कोशिश कर रही हैं।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.