ग्लोबल दबाव के बीच आज भारतीय रुपया गिरावट के साथ खुल सकता है। डॉलर के मुकाबले यह **95.05** के स्तर पर ट्रेड कर रहा है। ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में उछाल और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड में तेजी का असर मार्केट सेंटीमेंट पर दिख रहा है।
बुधवार को बाजार खुलने के साथ ही भारतीय रुपये पर दबाव देखने को मिल सकता है। ट्रेडर्स के अनुसार, रुपया आज 95.02 से 95.06 के दायरे में रह सकता है, जबकि पिछले सत्र में यह 94.95 पर बंद हुआ था। हाल ही में रुपये ने तीन दिन की तेजी दर्ज की थी और 94.80 के दो महीने के उच्च स्तर तक पहुंचा था, लेकिन अब मैक्रो-इकोनॉमिक चुनौतियां इसे चुनौती दे रही हैं।
क्रूड ऑयल का बढ़ता दबाव
ब्रेंट क्रूड की कीमतें $96 प्रति बैरल के पार चली गई हैं, जिसकी मुख्य वजह अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव है। भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में तेल महंगा होने से देश का इंपोर्ट बिल बढ़ जाता है और डॉलर की डिमांड बढ़ने से रुपये में कमजोरी आती है। लंबे समय तक ऊंची कीमतें महंगाई को भी बढ़ावा दे सकती हैं।
अमेरिकी यील्ड और विदेशी फंड
दूसरा बड़ा दबाव अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड का है, जो बढ़कर 4.79% के स्तर पर पहुंच गई है। जब अमेरिका में ब्याज दरें बढ़ती हैं, तो वैश्विक निवेशक भारतीय बाजार से पैसा निकालकर सुरक्षित अमेरिकी एसेट्स में लगाने लगते हैं। इसका सीधा असर रुपये की वैल्यू पर पड़ता है।
RBI की भूमिका
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) लगातार डॉलर बेचकर रुपये को संभालने की कोशिश कर रहा है। हालांकि, यह एक चुनौतीपूर्ण काम है क्योंकि विदेशी मुद्रा भंडार और लिक्विडिटी के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। अगर RBI जरूरत से ज्यादा डॉलर बेचता है, तो घरेलू स्तर पर लिक्विडिटी कम हो सकती है, जिसका असर ब्याज दरों पर पड़ सकता है। फिलहाल निवेशकों की नजरें US फेडरल रिजर्व पर हैं, जहां सितंबर में ब्याज दरें बढ़ने की संभावना 67% जताई जा रही है।
