करेंसी मार्केट में आज भारतीय रुपया दबाव में नजर आया और यह **96.05** के स्तर तक फिसल गया। पिछले क्लोजिंग से इसमें **7 पैसे** की गिरावट दर्ज की गई है।
भारतीय रुपया 29 सितंबर, 2026 को डॉलर के मुकाबले 96.05 के स्तर पर कारोबार करता देखा गया। इससे पहले रुपया 95.98 पर बंद हुआ था, यानी इसमें 7 पैसे की गिरावट आई है। इस कमजोरी की मुख्य वजह ग्लोबल मार्केट में कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और डॉलर में आई मजबूती है।
कच्चे तेल की कीमतों का असर
भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल आयात करता है। वर्तमान में ब्रेंट क्रूड $99.16 प्रति बैरल के आसपास ट्रेड कर रहा है। तेल की कीमतें बढ़ने और रुपये के कमजोर होने से भारत के लिए इंपोर्ट बिल काफी महंगा हो जाता है। इसका सीधा असर देश में महंगाई पर पड़ सकता है क्योंकि फ्यूल कॉस्ट बढ़ने से ट्रांसपोर्टेशन और मैन्युफैक्चरिंग महंगी हो जाती है।
डॉलर में तेजी की वजह
डॉलर इंडेक्स 101.24 के करीब बना हुआ है। अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड्स में उछाल और फेडरल रिजर्व की मॉनेटरी पॉलिसी के संकेतों के चलते निवेशक इमर्जिंग मार्केट्स से पैसा निकालकर अमेरिकी एसेट्स की ओर रुख कर रहे हैं, जिससे रुपये पर बिकवाली का दबाव है।
RBI की भूमिका
मार्केट की नजरें अब Reserve Bank of India (RBI) पर टिकी हैं। हालांकि आरबीआई किसी फिक्स्ड एक्सचेंज रेट को टारगेट नहीं करता, लेकिन अत्यधिक उतार-चढ़ाव को रोकने के लिए वह अपने फॉरेन एक्सचेंज रिजर्व का इस्तेमाल कर सकता है। 96.00 का स्तर ट्रेडर्स के लिए एक मनोवैज्ञानिक बाधा (Psychological barrier) बना हुआ है। आने वाले दिनों में अमेरिकी इकोनॉमिक डेटा रुपये की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएंगे।
