Indian Rupee: रुपये में 37 पैसे की रिकवरी, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा टेंशन

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AuthorAditya Rao|Published at:
Indian Rupee: रुपये में 37 पैसे की रिकवरी, लेकिन विदेशी निवेशकों की बिकवाली से बढ़ा टेंशन

US बॉन्ड यील्ड में गिरावट और क्रूड ऑयल की कीमतों में स्थिरता के चलते भारतीय रुपया इस हफ्ते **37 पैसे** मजबूत हुआ है। हालांकि, बाजार के लिए चिंता की बात यह है कि विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने इस साल अब तक **$19 बिलियन** से ज्यादा की निकासी कर ली है।

रुपये में सुधार की मुख्य वजहें

भारतीय रुपया हाल ही में 95.59 के स्तर पर बंद हुआ है। इससे पहले करेंसी 96.10 के दो महीने के निचले स्तर तक गिर गई थी। रुपये को संभलने में दो बड़े ट्रिगर मिले: पहला, US सरकारी बॉन्ड की ब्याज दरें 5% से घटकर 4.93% पर आ गई हैं। दूसरा, सऊदी अरब द्वारा एक्सपोर्ट बढ़ाए जाने के कारण क्रूड ऑयल की कीमतों में नरमी आई है। भारत के लिए तेल सस्ता होना इंपोर्ट बिल कम करने जैसा है, जो रुपये के लिए एक पॉजिटिव संकेत है।

FIIs की बिकवाली का दबाव

राहत के बावजूद मार्केट में डर कायम है। डेटा के अनुसार, पिछले एक हफ्ते में ही विदेशी निवेशकों ने $600 मिलियन के शेयर और बॉन्ड बेचे हैं। सितंबर में कुल $3.1 बिलियन की निकासी हुई है, जिसके चलते इस साल कुल आउटफ्लो $19 बिलियन के आंकड़े को पार कर चुका है। यह बिकवाली रुपये की तेजी को रोकने के लिए एक 'भारी एंकर' का काम कर रही है।

निवेशकों के लिए क्या है संकेत?

रुपये की चाल का सीधा असर उन कंपनियों पर पड़ता है जो इंपोर्ट पर निर्भर हैं, जैसे तेल रिफाइनर, इलेक्ट्रॉनिक्स और ज्वैलर्स। अगर डॉलर इंडेक्स 100.35 के आसपास बना रहता है, तो रुपये में और सुधार की गुंजाइश है। लेकिन अगर यह 100.50 के पार जाता है, तो रुपये पर फिर से दबाव बढ़ सकता है। निवेशकों को सलाह है कि वे डॉलर इंडेक्स पर नजर बनाए रखें क्योंकि यह आगे की दिशा तय करेगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.