Indian Private Sector: कंपनियों का निवेश सुस्त, Capex में आई बड़ी गिरावट

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AuthorNeha Patil|Published at:
Indian Private Sector: कंपनियों का निवेश सुस्त, Capex में आई बड़ी गिरावट

भारत में प्राइवेट सेक्टर का निवेश रफ्तार खो रहा है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में प्रति कंपनी औसतन कैपिटल स्पेंडिंग (Capital Spending) घटकर **₹1.6 बिलियन** पर आ गई है। मांग में अनिश्चितता के चलते कंपनियां अब नए प्रोजेक्ट्स के बजाय लागत घटाने पर जोर दे रही हैं।

भारतीय प्राइवेट कॉर्पोरेट सेक्टर में नई परियोजनाओं को लेकर सुस्ती साफ नजर आ रही है। ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फाइनेंशियल ईयर 2025 में प्रति उद्यम कैपिटल एक्सपेंडिचर (Capex) ₹1.6 बिलियन पर स्थिर हो गया है। यह आंकड़ा फाइनेंशियल ईयर 2023 के ₹2.6 बिलियन के पीक से काफी नीचे है, जो यह दर्शाता है कि महामारी के बाद आई निवेश की तेजी अब खत्म हो चुकी है।

लागत कटौती पर कंपनियों का फोकस

नई क्षमता (Capacity) बनाने या बड़े प्रोजेक्ट्स शुरू करने के बजाय, अब कंपनियां अपनी बैलेंस शीट को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित कर रही हैं। बोर्ड रूम में विस्तार के बजाय कर्ज कम करने और खर्चों को नियंत्रित करने की रणनीति अपनाई जा रही है। एक सर्वे के अनुसार, फाइनेंशियल ईयर 2027 के लिए सर्वे की गई आधी से अधिक कंपनियों ने साफ कहा है कि फिलहाल उनका कोई भी नया कैपिटल स्पेंडिंग प्लान नहीं है।

निवेश और खर्च के बीच का अंतर

कंपनियों की झिझक का सबसे बड़ा सबूत उनके वादों और काम में दिख रहा अंतर है। फाइनेंशियल ईयर 2025 में कंपनियों ने अपने प्रस्तावित खर्च का केवल 96.3% ही पूरा किया है, जबकि फाइनेंशियल ईयर 2023 में यह आंकड़ा 111.9% था। इसका मतलब साफ है कि या तो प्रोजेक्ट्स देरी से चल रहे हैं या फिर खराब मार्केट कंडीशन्स के कारण उन्हें रद्द किया जा रहा है।

कमजोर मांग और घटता सेंटीमेंट

निवेश में इस गिरावट की बड़ी वजह कमजोर कंज्यूमर डिमांड और अनिश्चित एक्सपोर्ट ऑर्डर हैं। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सर्वे के अनुसार, मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में बिजनेस सेंटीमेंट का तीन महीने का औसत गिरकर 12.9% रह गया है, जो पहले 31.4% के स्तर पर था। इसके अलावा, 'कैपेसिटी यूटिलाइजेशन' भी 2012 के ऐतिहासिक बेंचमार्क 84% से काफी नीचे चल रहा है। जब फैक्ट्रियां पूरी क्षमता पर नहीं चल रही हों, तो नई मशीनरी या नए प्लांट में निवेश का कोई मतलब नहीं रह जाता।

निवेशकों के लिए फिलहाल सतर्क रहने का समय है। आने वाले समय में कंपनियों की कमेंट्री और डिमांड में सुधार के संकेत ही इस सेक्टर की दिशा तय करेंगे।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.