Indian PSUs और AI का जोखिम: तेजी से डिजिटल हो रही सरकारी कंपनियां, लेकिन सुरक्षा नियमों का है टोटा

ECONOMY
Whalesbook Logo
AuthorKaran Malhotra|Published at:
Indian PSUs और AI का जोखिम: तेजी से डिजिटल हो रही सरकारी कंपनियां, लेकिन सुरक्षा नियमों का है टोटा

भारत की सरकारी कंपनियां यानी PSUs बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अपना रही हैं, लेकिन ज्यादातर के पास इसके लिए जरूरी रिस्क फ्रेमवर्क और टेस्टिंग सिस्टम का अभाव है। यह गवर्नेंस गैप भविष्य में बड़े ऑपरेशनल जोखिम पैदा कर सकता है।

भारत की सरकारी कंपनियां (PSUs) इस समय अपने डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन के दौर से गुजर रही हैं। एफिशिएंसी बढ़ाने और सेवाओं को आधुनिक बनाने के लिए ये कंपनियां तेजी से AI को अपना रही हैं। हालांकि, इस दौड़ में एक बड़ी कमी सामने आई है। डेटा के मुताबिक, भारत में एंटरप्राइज AI निवेश में 119% की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि देश की सिर्फ 22% कंपनियां ही ऐसी हैं जिन्होंने AI को सुरक्षित तरीके से चलाने के लिए औपचारिक गवर्नेंस, टेस्टिंग और ऑडिटिंग फ्रेमवर्क तैयार किया है।

सिस्टम पर मंडराते खतरे

PSUs के लिए AI इंटीग्रेशन के जोखिम निजी कंपनियों के मुकाबले कहीं ज्यादा गंभीर हैं। ये कंपनियां भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और ऊर्जा से लेकर वेलफेयर स्कीमों तक को मैनेज करती हैं। सरकार को हर साल ₹1.04 लाख करोड़ से ज्यादा का डिविडेंड देने वाली इन संस्थाओं की किसी भी तकनीकी चूक का सीधा असर पूरी इकोनॉमी पर पड़ सकता है। जानकारों को डर है कि बिना किसी पुख्ता सुरक्षा कवच के AI अपनाने से 'मॉडल ड्रिफ्ट' और पब्लिक सर्विस में भेदभाव जैसी दिक्कतें आ सकती हैं। इसके अलावा, पुराने लेगेसी सिस्टम्स के साथ नई टेक्नोलॉजी को जोड़ने से साइबर सिक्योरिटी का खतरा भी बढ़ गया है।

सरकार ने कसी लगाम

बढ़ते खतरों को देखते हुए सरकार अब सख्त हो गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय और 'IndiaAI Mission' अब जवाबदेही और डेटा इंटीग्रिटी पर जोर दे रहे हैं। 30 अक्टूबर 2026 को टेलीकॉम रेगुलेटरी अथॉरिटी ऑफ इंडिया (TRAI) ने टेलीकॉम सेक्टर के लिए AI के इस्तेमाल पर ड्राफ्ट गाइडलाइंस जारी की हैं, जिसमें कंपनियों को बोर्ड-अनुमोदित नीतियां बनाना अनिवार्य कर दिया गया है। 'डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट' के तहत भी अनुपालन (Compliance) अब प्राथमिकता बन गया है।

निवेशकों के लिए संकेत

आने वाले समय में निवेशकों को यह देखना होगा कि कौन सी PSU अपने AI गवर्नेंस को लेकर कितनी पारदर्शी है। कंपनियां अपनी AI ओवरसाइट कमेटियां कैसे बना रही हैं और सरकारी नियमों का पालन कितनी सख्ती से कर रही हैं, यही उनकी लॉन्ग-टर्म हेल्थ का असली पैमाना होगा।

Disclaimer: This article is published for informational purposes only. This is not a buy sell recommendation.