IT और मेटल सेक्टर की गिरावट बनी मुख्य वजह
यह गिरावट मुख्य रूप से IT सेक्टर में छाई मायूसी की वजह से हुई। दुनिया भर में AI ऑटोमेशन टूल्स को लेकर बढ़ती चिंताओं ने भारतीय IT कंपनियों के शेयरों को बुरी तरह प्रभावित किया। यह वही IT सेक्टर है जो पिछले दिन 6% तक गिर चुका था, और आज भी इसमें और गिरावट देखी गई। इसके साथ ही, मेटल सेक्टर में भी 2% की गिरावट आई। ग्लोबल कमोडिटी की गिरती कीमतों और डॉलर के मज़बूत होने का असर इस सेक्टर पर दिखा, खासकर चांदी (silver) की कीमतों में भारी गिरावट ने भी सेंटीमेंट को और खराब किया।
रेट-सेंसिटिव सेक्टर्स जैसे फाइनेंसियल, ऑटो और रियल एस्टेट में भी दबाव देखा गया। निवेशकों ने सावधानी भरा रवैया अपनाया, क्योंकि अगले दिन भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) की मॉनेटरी पॉलिसी का ऐलान होना है।
ग्लोबल संकेत और घरेलू चिंताएँ
आज के ग्लोबल मार्केट के रिएक्शन को देखें तो, भारत के शेयर बाज़ार की चाल में घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय दोनों फैक्टर हावी रहे। जहां IT और कीमती धातुओं (precious metals) में गिरावट आई, वहीं एशिया के बाज़ार मिले-जुले दिखे। चीन और हांगकांग के बाज़ार भी टेक और कमोडिटी की कीमतों को लेकर चिंताओं के चलते नीचे कारोबार कर रहे थे। हाल ही में हुए इंडिया-यूएसए ट्रेड डील ने बाज़ार को पिछले तीन दिनों से तेज़ी दी थी, लेकिन अब ये सारी उम्मीदें IT सेक्टर की नई चिंताओं और ग्लोबल रिस्क से दब गई हैं।
वैल्यूएशन और पिछला प्रदर्शन
अगर वैल्यूएशन की बात करें तो, Nifty 50 इंडेक्स फिलहाल लगभग 22.4 के प्राइस-टू-अर्निंग (P/E) रेश्यो पर ट्रेड कर रहा है, जबकि Sensex का P/E रेश्यो करीब 23.0 है। हालांकि ये वैल्यूएशन ऐतिहासिक रूप से बहुत ज़्यादा नहीं हैं, पर हालिया तेज़ी के बाद ये दिखाते हैं कि बाज़ार में भविष्य की ग्रोथ का काफी अनुमान पहले से ही लगा लिया गया था, और अब इसमें थोड़ी प्रॉफिट-बुकिंग (profit-booking) हो रही है। आपको बता दें कि Sensex ने दिसंबर 2025 में ही अपना ऑल-टाइम हाई 86,159.02 का स्तर छुआ था।
RBI की पॉलिसी पर सबकी नज़र
RBI की मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) की मीटिंग 6 फरवरी 2026 को खत्म हो रही है, और उम्मीद है कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं होगा। बाज़ार की नज़रें RBI के अगले कदमों पर टिकी हैं, खासकर लिक्विडिटी मैनेजमेंट और पिछली दर कट (rate cut) के असर को लेकर। एनालिस्ट्स का मानना है कि RBI के कमेंट्स और इंडिया-यूएसए ट्रेड डील से जुड़े नए अपडेट्स से ही बाज़ार की आगे की दिशा तय होगी।
आगे क्या? बाज़ार में कंसॉलिडेशन की उम्मीद
बाज़ार के जानकारों का मानना है कि हालिया तेज़ी और उसके बाद की गिरावट के चलते, आने वाले दिनों में बाज़ार में कंसॉलिडेशन (consolidation) का दौर देखने को मिल सकता है। IT सेक्टर पर AI को लेकर लगातार नज़र रखी जाएगी। निवेशक RBI की पॉलिसी और ग्लोबल आर्थिक हालातों पर पैनी नज़र रखेंगे। भले ही डोमेस्टिक कंजम्पशन और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे थीम सपोर्टिव बने हुए हैं, लेकिन फिलहाल बाज़ार की दिशा जियो-पॉलिटिकल फैक्टर, कमोडिटी साइकिल्स और सेंट्रल बैंक की पॉलिसी से ही तय होगी।
