अगस्त 2026 में भारतीय शेयर बाजार एक दायरे में फंसा हुआ है। विदेशी निवेशकों (FPI) ने बाजार में **₹23,544 करोड़** का भारी निवेश किया है, लेकिन घरेलू बिकवाली और लगातार आ रहे IPOs ने इस तेजी को बेअसर कर दिया है। अब निवेशकों की नजरें GDP डेटा पर टिकी हैं।
भारतीय शेयर बाजार फिलहाल एक लंबी जद्दोजहद के दौर से गुजर रहा है। अगस्त 2026 में विदेशी संस्थागत निवेशकों (FPIs) की वापसी के बावजूद, सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख इंडेक्स अपने तय दायरे से बाहर निकलने में संघर्ष कर रहे हैं। आंकड़े बताते हैं कि अगस्त में FPIs ने ₹23,544 करोड़ का निवेश किया है, जो पिछली बिकवाली के बाद एक बड़ा बदलाव है। हालांकि, बाजार में बड़ी रैली न आने की वजह घरेलू निवेशकों की बिकवाली और प्राइमरी मार्केट में नए शेयरों की भारी सप्लाई रही है।
बाजार का हाल और सेंटीमेंट
28 अगस्त 2026 को बाजार ने दो दिन की गिरावट को पीछे छोड़ा और सेंसेक्स में 0.43% और निफ्टी में 0.35% की बढ़त देखी गई, लेकिन सेंटीमेंट अभी भी सतर्क बना हुआ है। मार्केट में आ रहे लगातार IPOs ने लिक्विडिटी का बड़ा हिस्सा सोख लिया है। गौर करने वाली बात यह है कि FPIs पिछले दो महीनों से नेट बायर रहे हैं, लेकिन 2026 कैलेंडर ईयर में वे अब भी ₹2.3 लाख करोड़ के नेट सेलर हैं।
सेक्टर का हाल और नजरें
IT सेक्टर ने ग्लोबल संकेतों और AI इंफ्रास्ट्रक्चर की उम्मीदों के दम पर बाजार को सहारा दिया है। इसके उलट, FMCG और ऑटो सेक्टर पर दबाव दिख रहा है। इनपुट कॉस्ट बढ़ने से मार्जिन पर असर पड़ा है, जिससे निवेशकों की चिंता बढ़ गई है कि क्या कंपनियां इसका बोझ ग्राहकों पर डाल पाएंगी।
अगली दिशा क्या होगी?
अब सबकी निगाहें 31 अगस्त 2026 को आने वाले जून-तिमाही के GDP डेटा (Q1 FY27) पर हैं, जिसके 7.4% रहने का अनुमान है। यह आंकड़ा बाजार के लिए 'ट्रिगर' का काम कर सकता है। इसके अलावा, क्रूड ऑयल की कीमतें और रुपये की चाल पर भी निवेशकों की नजरें बनी रहेंगी, क्योंकि यही वो फैक्टर्स हैं जो बाजार को नई दिशा देंगे।
